Durga Visarjan Kab Hai: रवि योग के महासंयोग में विदा होंगी मां दुर्गा, नोट कर लें विसर्जन का सटीक समय
16 Oct 2026, 03:47 PM

Durga Visarjan Kab Hai: रवि योग के महासंयोग में विदा होंगी मां दुर्गा, नोट कर लें विसर्जन का सटीक समय

ABP News
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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="1"><strong>Sharad Navratri 2026:</strong> शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का उल्लास पूरे देश में देखने को मिल रहा है. आश्विन शुक्ल षष्ठी यानी महाषष्ठी के दिन से दुर्गा पूजा का महापर्व बड़े ही धूमधाम से शुरू होता है. मां दुर्गा चार दिनों तक अपने भक्तों के बीच विराजमान रहती हैं और फिर विजयादशमी के दिन उन्हें नम आंखों से विदाई दी जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="1">इस साल दुर्गा विसर्जन और महाअष्टमी की तिथियों को लेकर लोगों में काफी असमंजस बना हुआ है. आइए जानते हैं दुर्गा विसर्जन की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, रवि योग और अष्टमी तिथि का पूरा गणित.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="3">दुर्गा विसर्जन कब है? जानें सही तारीख</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4">हिंदू पंचांग के अनुसार, दुर्गा विसर्जन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है. जिन घरों या पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है, वहां दशमी को पूजन के बाद किसी पवित्र नदी, सरोवर या तालाब में प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="5,0,0"><strong data-path-to-node="5,0,0" data-index-in-node="0">दशमी तिथि प्रारंभ:</strong> 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से</li>
<li data-path-to-node="5,1,0"><strong data-path-to-node="5,1,0" data-index-in-node="0">दशमी तिथि समाप्त:</strong> 21 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट तक</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="6">उदयातिथि और धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, दुर्गा विसर्जन का मुख्य पर्व <strong data-path-to-node="6" data-index-in-node="70">21 अक्टूबर</strong> को मनाया जाएगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="8">विसर्जन के लिए 2 घंटे 16 मिनट का शुभ मुहूर्त</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="9">इस बार दुर्गा विसर्जन पर मां की विदाई के लिए भक्तों को केवल <strong data-path-to-node="9" data-index-in-node="60">2 घंटे 16 मिनट</strong> की शुभ अवधि प्राप्त होगी. इसी निर्धारित समय में विसर्जन से जुड़े सभी कर्मकांड, महाआरती और सिंदूर खेला की रस्में पूरी की जाएंगी.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="10">धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन <strong data-path-to-node="10" data-index-in-node="28">रवि योग</strong> का महासंयोग भी बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि रवि योग में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान और विदाई से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="12">श्रवण नक्षत्र का विशेष महत्व</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="13">शास्त्रों के अनुसार, दशमी तिथि के दिन जब श्रवण नक्षत्र का संयोग बनता है, तभी विजयादशमी का पर्व और दुर्गा विसर्जन पूर्ण रूप से फलदायी माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="14">पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ नक्षत्र में भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण पर विजय प्राप्त की थी और मां दुर्गा ने असुर महिषासुर का संहार किया था. श्रवण नक्षत्र में मां की विदाई करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="16">दुर्गा अष्टमी 18 या 19 अक्टूबर? </h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="17">दुर्गा विसर्जन से पहले महाअष्टमी यानी दुर्गा अष्टमी के व्रत को लेकर भी लोग उलझन में हैं कि व्रत 18 अक्टूबर को रखें या 19 अक्टूबर को.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="18">ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी के अनुसार:</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="19,0,0"><strong data-path-to-node="19,0,0" data-index-in-node="0">अष्टमी तिथि की शुरुआत:</strong> 18 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 08 बजकर 27 मिनट पर</li>
<li data-path-to-node="19,1,0"><strong data-path-to-node="19,1,0" data-index-in-node="0">अष्टमी तिथि का समापन:</strong> 19 अक्टूबर (सोमवार) को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="20">18 अक्टूबर को सुबह 06:24 बजे सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहेगी, जिसके बाद 08:27 बजे अष्टमी शुरू हो जाएगी. वहीं 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि केवल सुबह 10:51 बजे तक ही रहेगी और उसके तुरंत बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="21">ऐसे में 18 अक्टूबर को पूरे दिन और शाम के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी. इसलिए जो लोग संधि पूजा और मां महागौरी की विशेष आराधना करते हैं, उनके लिए 18 अक्टूबर का दिन विशेष रूप से उत्तम रहेगा. वहीं उदयातिथि की परंपरा मानने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे से पहले अष्टमी पूजन और कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="23">मां की विदाई की सही विधि</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="24">दशमी के दिन प्रात:काल स्नान करके मां दुर्गा की अंतिम आरती करें और उन्हें फल, मिष्ठान, खीर व पूड़ी का विशेष भोग लगाएं. इसके बाद सुहागिन महिलाएं मां को पान, बताशे और सिंदूर अर्पित कर आपस में 'सिंदूर खेला' की रस्म निभाती हैं. अंत में मां से परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हुए क्षमा याचना करें और गाजे-बाजे के साथ प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाएं.</p>
<h4 class="abp-article-title" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/saraswati-puja-2026-date-significance-shubh-muhurat-puja-vidhi-3202717">Saraswati Puja 2026: कब है सरस्वती पूजा? नोट करें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और आसान पूजा विधि</a></strong></h4>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="24"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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