16 Oct 2026, 03:47 PM
Aaj Ka Panchang 16 October 2026: नवरात्रि की षष्ठी पर सरस्वती आवाहन आज, जानें पूजा का समय और राहुकाल
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Aaj Ka Panchang:</strong> 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है. आज मां कात्यायनी की पूजा होगी और नवरात्रि के सरस्वती पूजन की शुरुआत आवाहन से होगी. दिल्ली NCR में सरस्वती आवाहन का समय दोपहर 3:33 से शाम 5:51 बजे तक है. राहुकाल सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आज पूजा की तैयारी करते समय एक फर्क समझना जरूरी है. मां कात्यायनी की आराधना, सरस्वती आवाहन और सरस्वती की प्रधान पूजा अलग अनुष्ठान हैं. आवाहन आज है, जबकि इस नवरात्रि पूजा क्रम में सरस्वती की प्रधान पूजा 17 अक्टूबर को होगी. इसलिए दोनों की तारीख और समय को एक न समझें.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">तिथि- षष्ठी, 17 अक्टूबर सुबह 5:54 तक <br />नक्षत्र- ज्येष्ठा सुबह 6:47 तक, फिर मूल <br />योग- शोभन रात 10:06 तक, फिर अतिगण्ड <br />चंद्र राशि- सुबह 6:47 तक वृश्चिक, फिर धनु <br />सूर्य राशि- कन्या <br />सूर्योदय-सूर्यास्त: सुबह 6:22-शाम 5:51 <br />चंद्रोदय-चंद्रास्त: सुबह 11:39-रात 9:36 <br />करण- कौलव शाम 4:38 तक, फिर तैतिल</p>
<p style="text-align: justify;">पंचांग अनुसार पूर्णिमांत और अमांत, दोनों गणनाओं में आश्विन मास है. षष्ठी पूरी शाम और रात रहेगी. सप्तमी अगले दिन भोर में शुरू होगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सरस्वती आवाहन आज है, तो प्रधान पूजा कल क्यों?</h3>
<p style="text-align: justify;">आवाहन का अर्थ है देवी को पूजन के लिए आमंत्रित करना. नवरात्रि में होने वाले सरस्वती पूजन का यह पहला चरण है. इसके बाद प्रधान पूजा होती है. इस पूजा क्रम में आवाहन मूल नक्षत्र से जुड़ा है. इसलिए केवल षष्ठी तिथि देखकर सरस्वती पूजा के सभी अनुष्ठानों का समय तय नहीं किया जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">आज आवाहन की अवधि 2 घंटे 18 मिनट है. परिवार में यह परंपरा निभाई जाती है तो पूजा की सामग्री पहले तैयार रख सकते हैं. इससे निर्धारित समय में अनुष्ठान शुरू करने में आसानी होगी. यह समय सरस्वती आवाहन के लिए है. इसे मां कात्यायनी की दिनभर की आराधना का एकमात्र समय न समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की आराधना की जाती है. धार्मिक वर्णन में देवी सिंह पर विराजमान हैं. उनकी चार भुजाएं हैं. बाएं हाथों में तलवार और कमल हैं, जबकि दाएं हाथ अभय और वरदान की मुद्रा में हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूजा में देवी को लाल फूल, विशेषकर गुलाब अर्पित करने की परंपरा है. &ldquo;ॐ देवी कात्यायन्यै नमः&rdquo; मंत्र से उनका स्मरण कर सकते हैं. घर में नवरात्रि की जो नियमित पूजा चल रही है, उसी क्रम में कात्यायनी स्वरूप का ध्यान और आरती करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आवाहन के समय यमगण्ड और वर्ज्य भी हैं, क्या ध्यान रखें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सरस्वती आवाहन की अवधि के कुछ हिस्से में यमगण्ड और वर्ज्य भी पड़ रहे हैं. इसलिए पूरे आवाहन काल को हर नए काम के लिए शुभ बताना सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आवाहन का दिया गया समय अनुष्ठान से जुड़ा है. कारोबार की शुरुआत या दूसरी मांगलिक गतिविधि के लिए उसे सीधे लागू न करें. वहीं, यमगण्ड और वर्ज्य के मिनट घटाकर अपनी ओर से नया आवाहन मुहूर्त भी न बनाएं. पूजा कराने वाले पुरोहित को यह समय-सारणी दिखाकर अपने परिवार की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान तय करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का राहुकाल और दूसरे अशुभ समय</h3>
<ul>
<li style="text-align: justify;">राहुकाल- सुबह 10:40-दोपहर 12:06</li>
<li style="text-align: justify;">यमगण्ड- दोपहर 2:58-शाम 4:25</li>
<li style="text-align: justify;">गुलिक काल- सुबह 7:48-9:14</li>
<li style="text-align: justify;">दुष्टमुहूर्त- सुबह 8:40-9:26 और दोपहर 12:29-1:15</li>
<li style="text-align: justify;">वर्ज्य- दोपहर 3:47-शाम 5:35</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">परंपरागत मुहूर्त विचार में नए कार्य की शुरुआत के लिए इन अवधियों को देखा जाता है. इन्हें रोजमर्रा के जरूरी काम रोकने का निर्देश न समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शुभ समय कब हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:42-5:32, अभिजीत सुबह 11:43-दोपहर 12:29, विजय मुहूर्त दोपहर 2:01-2:47 और गोधूलि शाम 5:51-6:16 है. निशिता मुहूर्त रात 11:42 से 17 अक्टूबर की रात 12:32 तक रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">अभिजीत के शुरुआती हिस्से में राहुकाल भी है. इसलिए केवल अभिजीत का नाम देखकर पूरी अवधि को हर मांगलिक काम के लिए उपयुक्त न मानें. रवि योग सुबह 6:47 से 17 अक्टूबर सुबह 6:23 तक है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">कात्यायनी पूजा और सरस्वती आवाहन अलग अनुष्ठान हैं.<br />सरस्वती आवाहन आज है, इस पूजा क्रम की प्रधान पूजा 17 अक्टूबर को होगी.<br />पंचांग में 17 अक्टूबर सुबह 5:54 का अर्थ अगली सुबह है. आज शाम षष्ठी ही रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज पूजा की तैयारी करते समय एक फर्क समझना जरूरी है. मां कात्यायनी की आराधना, सरस्वती आवाहन और सरस्वती की प्रधान पूजा अलग अनुष्ठान हैं. आवाहन आज है, जबकि इस नवरात्रि पूजा क्रम में सरस्वती की प्रधान पूजा 17 अक्टूबर को होगी. इसलिए दोनों की तारीख और समय को एक न समझें.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">तिथि- षष्ठी, 17 अक्टूबर सुबह 5:54 तक <br />नक्षत्र- ज्येष्ठा सुबह 6:47 तक, फिर मूल <br />योग- शोभन रात 10:06 तक, फिर अतिगण्ड <br />चंद्र राशि- सुबह 6:47 तक वृश्चिक, फिर धनु <br />सूर्य राशि- कन्या <br />सूर्योदय-सूर्यास्त: सुबह 6:22-शाम 5:51 <br />चंद्रोदय-चंद्रास्त: सुबह 11:39-रात 9:36 <br />करण- कौलव शाम 4:38 तक, फिर तैतिल</p>
<p style="text-align: justify;">पंचांग अनुसार पूर्णिमांत और अमांत, दोनों गणनाओं में आश्विन मास है. षष्ठी पूरी शाम और रात रहेगी. सप्तमी अगले दिन भोर में शुरू होगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सरस्वती आवाहन आज है, तो प्रधान पूजा कल क्यों?</h3>
<p style="text-align: justify;">आवाहन का अर्थ है देवी को पूजन के लिए आमंत्रित करना. नवरात्रि में होने वाले सरस्वती पूजन का यह पहला चरण है. इसके बाद प्रधान पूजा होती है. इस पूजा क्रम में आवाहन मूल नक्षत्र से जुड़ा है. इसलिए केवल षष्ठी तिथि देखकर सरस्वती पूजा के सभी अनुष्ठानों का समय तय नहीं किया जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">आज आवाहन की अवधि 2 घंटे 18 मिनट है. परिवार में यह परंपरा निभाई जाती है तो पूजा की सामग्री पहले तैयार रख सकते हैं. इससे निर्धारित समय में अनुष्ठान शुरू करने में आसानी होगी. यह समय सरस्वती आवाहन के लिए है. इसे मां कात्यायनी की दिनभर की आराधना का एकमात्र समय न समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की आराधना की जाती है. धार्मिक वर्णन में देवी सिंह पर विराजमान हैं. उनकी चार भुजाएं हैं. बाएं हाथों में तलवार और कमल हैं, जबकि दाएं हाथ अभय और वरदान की मुद्रा में हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूजा में देवी को लाल फूल, विशेषकर गुलाब अर्पित करने की परंपरा है. &ldquo;ॐ देवी कात्यायन्यै नमः&rdquo; मंत्र से उनका स्मरण कर सकते हैं. घर में नवरात्रि की जो नियमित पूजा चल रही है, उसी क्रम में कात्यायनी स्वरूप का ध्यान और आरती करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आवाहन के समय यमगण्ड और वर्ज्य भी हैं, क्या ध्यान रखें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सरस्वती आवाहन की अवधि के कुछ हिस्से में यमगण्ड और वर्ज्य भी पड़ रहे हैं. इसलिए पूरे आवाहन काल को हर नए काम के लिए शुभ बताना सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आवाहन का दिया गया समय अनुष्ठान से जुड़ा है. कारोबार की शुरुआत या दूसरी मांगलिक गतिविधि के लिए उसे सीधे लागू न करें. वहीं, यमगण्ड और वर्ज्य के मिनट घटाकर अपनी ओर से नया आवाहन मुहूर्त भी न बनाएं. पूजा कराने वाले पुरोहित को यह समय-सारणी दिखाकर अपने परिवार की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान तय करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का राहुकाल और दूसरे अशुभ समय</h3>
<ul>
<li style="text-align: justify;">राहुकाल- सुबह 10:40-दोपहर 12:06</li>
<li style="text-align: justify;">यमगण्ड- दोपहर 2:58-शाम 4:25</li>
<li style="text-align: justify;">गुलिक काल- सुबह 7:48-9:14</li>
<li style="text-align: justify;">दुष्टमुहूर्त- सुबह 8:40-9:26 और दोपहर 12:29-1:15</li>
<li style="text-align: justify;">वर्ज्य- दोपहर 3:47-शाम 5:35</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">परंपरागत मुहूर्त विचार में नए कार्य की शुरुआत के लिए इन अवधियों को देखा जाता है. इन्हें रोजमर्रा के जरूरी काम रोकने का निर्देश न समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शुभ समय कब हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:42-5:32, अभिजीत सुबह 11:43-दोपहर 12:29, विजय मुहूर्त दोपहर 2:01-2:47 और गोधूलि शाम 5:51-6:16 है. निशिता मुहूर्त रात 11:42 से 17 अक्टूबर की रात 12:32 तक रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">अभिजीत के शुरुआती हिस्से में राहुकाल भी है. इसलिए केवल अभिजीत का नाम देखकर पूरी अवधि को हर मांगलिक काम के लिए उपयुक्त न मानें. रवि योग सुबह 6:47 से 17 अक्टूबर सुबह 6:23 तक है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">कात्यायनी पूजा और सरस्वती आवाहन अलग अनुष्ठान हैं.<br />सरस्वती आवाहन आज है, इस पूजा क्रम की प्रधान पूजा 17 अक्टूबर को होगी.<br />पंचांग में 17 अक्टूबर सुबह 5:54 का अर्थ अगली सुबह है. आज शाम षष्ठी ही रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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