26 Oct 2026, 06:53 PM
केंद्र का बड़ा फैसला, अस्पतालों में सिंगल-यूज मेडिकल डिवाइस पर सख्त बैन
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">देश के अस्पतालों में मरीजों की सेहत और उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है. सरकार ने देश भर के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों को दोबारा धोकर या सैनिटाइज करके इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवा DGHS द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अस्पतालों की इस लापरवाही से मरीजों में गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस फैसले को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं ताकि मरीजों की जान से होने वाले खिलवाड़ को रोका जा सके.</p>
<h3 style="text-align: justify;">इन गंभीर बीमारियों और संक्रमण का था बड़ा खतरा</h3>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कई बार इस्तेमाल किए गए उपकरणों को स्टरलाइज यानी साफ करने के बाद भी वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते हैं. ऐसे उपकरणों पर पुराना जैविक कचरा या बैक्टीरिया छिपे रह सकते हैं, जो सीधे मरीज के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य महानिदेशालय ने चेतावनी दी है कि इस लापरवाही के कारण मरीजों में हेपेटाइटिस बी, हेपेॉटाइटिस सी और HIV जैसी जानलेवा बीमारियां फैलने का सबसे ज्यादा डर रहता है. इसके साथ ही अस्पतालों में होने वाले गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का बोझ भी मरीजों पर बढ़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभागों में हो रही थी लापरवाही</h3>
<p style="text-align: justify;">सरकारी जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पतालों के कई बड़े और महत्वपूर्ण विभागों में महंगे मेडिकल उपकरणों को दोबारा काम में लिया जा रहा था. इनमें मुख्य रूप से दिल की बीमारियों से जुड़े कार्डियोलॉजी विभाग में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर और बैलून कैथेटर शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा किडनी के इलाज नेफ्रोलॉजी में काम आने वाले डायलाइजर और ब्लड ट्यूबिंग को भी दोबारा इस्तेमाल करने के मामले पकड़े गए हैं. कैंसर और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में भी सर्जिकल स्टेपलर, लेप्रोस्कोपिक ट्रॉकर और सुइयों को दोबारा इस्तेमाल करने की शिकायतें मिल रही थीं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मरीजों की जेब पर डाका और नियमों का उल्लघंन</h3>
<p style="text-align: justify;">इस बड़ी पाबंदी के पीछे केवल स्वास्थ्य से जुड़े कारण ही नहीं हैं, बल्कि आर्थिक धोखाधड़ी भी एक बड़ी वजह है. सरकार को ऐसी रिपोर्ट मिली थीं कि कई नामी कॉर्पोरेट अस्पताल एक बार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को धोकर दूसरे मरीज पर इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन उस नए मरीज से बिल में पूरे नए उपकरण के पैसे वसूले जा रहे थे.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य महानिदेशालय ने साफ किया है कि यह हरकत ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के कड़े नियमों का सीधा उल्लघंन है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/air-pollution-symptoms-persistent-cough-and-prevention-3206078"><strong>रह-रहकर आ रही खांसी, कहीं पॉल्यूशन का शिकार तो नहीं हो गए आप?</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">सभी राज्यों को निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश</h3>
<p style="text-align: justify;">केंद्र सरकार के इस नए आदेश के बाद अब स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है. सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य विभागों और ड्रग कंट्रोलर को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के अस्पतालों पर कड़ी निगरानी रखें. ड्रग इंस्पेक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की सरप्राइज चेकिंग करें.</p>
<p style="text-align: justify;">यदि कोई भी अस्पताल नियमों को तोड़ता हुआ या ओरिजिनल मैन्यूफैक्चरर के नियमों के खिलाफ जाकर उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/what-is-52-17-rule-for-work-life-balance-how-does-it-boost-productivity-3206170"><strong>वर्क लाइफ बैलेंस के लिए क्या है 52/17 रूल, इससे कैसे बढ़ती है प्रोडक्टिविटी?</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">इन गंभीर बीमारियों और संक्रमण का था बड़ा खतरा</h3>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कई बार इस्तेमाल किए गए उपकरणों को स्टरलाइज यानी साफ करने के बाद भी वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते हैं. ऐसे उपकरणों पर पुराना जैविक कचरा या बैक्टीरिया छिपे रह सकते हैं, जो सीधे मरीज के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य महानिदेशालय ने चेतावनी दी है कि इस लापरवाही के कारण मरीजों में हेपेटाइटिस बी, हेपेॉटाइटिस सी और HIV जैसी जानलेवा बीमारियां फैलने का सबसे ज्यादा डर रहता है. इसके साथ ही अस्पतालों में होने वाले गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का बोझ भी मरीजों पर बढ़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभागों में हो रही थी लापरवाही</h3>
<p style="text-align: justify;">सरकारी जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पतालों के कई बड़े और महत्वपूर्ण विभागों में महंगे मेडिकल उपकरणों को दोबारा काम में लिया जा रहा था. इनमें मुख्य रूप से दिल की बीमारियों से जुड़े कार्डियोलॉजी विभाग में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर और बैलून कैथेटर शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा किडनी के इलाज नेफ्रोलॉजी में काम आने वाले डायलाइजर और ब्लड ट्यूबिंग को भी दोबारा इस्तेमाल करने के मामले पकड़े गए हैं. कैंसर और न्यूरोसर्जरी जैसे विभागों में भी सर्जिकल स्टेपलर, लेप्रोस्कोपिक ट्रॉकर और सुइयों को दोबारा इस्तेमाल करने की शिकायतें मिल रही थीं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मरीजों की जेब पर डाका और नियमों का उल्लघंन</h3>
<p style="text-align: justify;">इस बड़ी पाबंदी के पीछे केवल स्वास्थ्य से जुड़े कारण ही नहीं हैं, बल्कि आर्थिक धोखाधड़ी भी एक बड़ी वजह है. सरकार को ऐसी रिपोर्ट मिली थीं कि कई नामी कॉर्पोरेट अस्पताल एक बार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को धोकर दूसरे मरीज पर इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन उस नए मरीज से बिल में पूरे नए उपकरण के पैसे वसूले जा रहे थे.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य महानिदेशालय ने साफ किया है कि यह हरकत ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के कड़े नियमों का सीधा उल्लघंन है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/air-pollution-symptoms-persistent-cough-and-prevention-3206078"><strong>रह-रहकर आ रही खांसी, कहीं पॉल्यूशन का शिकार तो नहीं हो गए आप?</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">सभी राज्यों को निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश</h3>
<p style="text-align: justify;">केंद्र सरकार के इस नए आदेश के बाद अब स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है. सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य विभागों और ड्रग कंट्रोलर को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के अस्पतालों पर कड़ी निगरानी रखें. ड्रग इंस्पेक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की सरप्राइज चेकिंग करें.</p>
<p style="text-align: justify;">यदि कोई भी अस्पताल नियमों को तोड़ता हुआ या ओरिजिनल मैन्यूफैक्चरर के नियमों के खिलाफ जाकर उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/what-is-52-17-rule-for-work-life-balance-how-does-it-boost-productivity-3206170"><strong>वर्क लाइफ बैलेंस के लिए क्या है 52/17 रूल, इससे कैसे बढ़ती है प्रोडक्टिविटी?</strong></a></p>
Source Credit: abplive.com
Read Full Story
2
Comments (0)