29 Oct 2026, 06:13 PM
World Stroke Day: क्या मोबाइल-लैपटॉप से हो सकता है स्ट्रोक? डॉक्टर ने बताया सच
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Stroke Awareness And Risk:</strong> हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है. इस दिन का मकसद स्ट्रोक को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़े जोखिमों को समझाना है. आज मोबाइल फोन, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. सुबह उठते ही फोन देखना, घंटों कंप्यूटर पर काम करना और रात में सोने से पहले सोशल मीडिया चलाना आम हो गया है. ऐसे में स्क्रीन टाइम और स्ट्रोक को लेकर कई तरह के दावे भी सामने आते रहते हैं. सवाल है कि क्या लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने से सीधे स्ट्रोक हो सकता है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन टाइम नहीं, बैठकर रहना हो सकता है बड़ी वजह</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली स्थित सीके बिरला अस्पताल के न्यूरोसाइंस विभाग के निदेशक डॉ. के.के. जिंदल के मुताबिक, स्क्रीन के सामने रहना अपने आप में स्ट्रोक का सीधा कारण साबित नहीं हुआ है. हालांकि, लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल अक्सर जिस अन एक्टिव से जुड़ा होता है, वह समय के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है. दरअसल, स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई रुक जाती है. ऐसा आमतौर पर किसी ब्लड वेसल में ब्लॉकेज या दिमाग में खून निकलने की वजह से होता है. ऑक्सीजन की कमी से दिमाग की सेल्स प्रभावित होने लगती हैं. यही वजह है कि स्ट्रोक होने पर जल्द से जल्द इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/29/5bba1a8bbff36c41bd1c2eba4667f32317932536318671257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घंटों बैठे रहने से बढ़ सकता है खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लंबे समय तक स्क्रीन देखने में चिंता की सबसे बड़ी वजह स्क्रीन नहीं, बल्कि उसके सामने घंटों बैठे रहना हो सकता है. लंबे समय तक बिना किसी शारीरिक गतिविधि के बैठे रहने से वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ये सभी स्ट्रोक के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की पत्रिका स्ट्रोक में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि 60 साल या उससे कम उम्र के ऐसे वयस्क, जो दिन में कम से कम आठ घंटे बैठे रहने वाली मनोरंजक गतिविधियों में बिताते थे और जिनकी शारीरिक गतिविधि कम थी, उनमें ज्यादा सक्रिय लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा अधिक था. हालांकि, यह शोध स्क्रीन टाइम और स्ट्रोक के बीच सीधे कारण-परिणाम को साबित नहीं करता. यह लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और स्ट्रोक के खतरे के बीच संबंध की ओर इशारा करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/29/30a75b7b3deb10a5af4c726ce300ec2517932536708931257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ स्क्रीन के घंटे देखकर खतरा नहीं समझ सकते</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले घंटों को अकेले देखकर स्ट्रोक के खतरे का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करता है, लेकिन नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसका जोखिम उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो उतने ही घंटे बैठता है और शारीरिक गतिविधि लगभग नहीं करता. लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है. खराब नींद ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक हेल्थ को कंट्रोल करना मुश्किल बना सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, ऐसी कोई तय स्क्रीन टाइम सीमा नहीं है, जिसके बाद किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होने की संभावना निश्चित रूप से बढ़ जाए. लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने का मतलब यह भी नहीं है कि व्यक्ति को स्ट्रोक होने वाला है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जिन लोगों को पहले स्ट्रोक या टीआईए हो चुका है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. इनमें ब्लड प्रेशर पर खास ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है. नियमित ब्लड प्रेशर की जांच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि लंबे समय में स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>युवाओं को भी नहीं समझना चाहिए खुद को सुरक्षित</strong></p>
<p style="text-align: justify;">युवाओं को यह नहीं मानना चाहिए कि स्ट्रोक सिर्फ उम्रदराज लोगों को होता है. उम्र बढ़ने के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, लेकिन कम उम्र में भी स्ट्रोक हो सकता है, खासकर जब कोई मेडिकल कंडीशन या दूसरे जोखिम कारक मौजूद हों.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन छोड़ने की जरूरत नहीं, बीच-बीच में चलें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना हर किसी के लिए संभव नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका काम कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर है. ऐसे में जरूरी है कि लगातार कई घंटे तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें. बीच-बीच में उठकर चलना, फोन पर बात करते समय संभव हो तो टहलना, काम के बीच स्ट्रेचिंग करना और रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक गतिविधि शामिल करना मददगार हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">वयस्कों को हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए. इसके साथ अपनी क्षमता के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत भी की जा सकती है. संतुलित डाइट, तंबाकू से दूरी, शराब का सेवन सीमित करना और पर्याप्त नींद भी शरीर और दिमाग की सेहत के लिए जरूरी हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने से नहीं रुकेगा स्ट्रोक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने से स्ट्रोक को रोका नहीं जा सकता. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए इन स्थितियों को कंट्रोल में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/ministry-of-ayush-warns-against-overstraining-the-body-during-yoga-3207005">योग करते समय शरीर पर न डालें जोर, आयुष मंत्रालय ने दी चेतावनी</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना जरूरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना भी उतना ही जरूरी है. चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना, शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक दिखाई देने में दिक्कत, तेज असंतुलन या बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए, भले ही कुछ मिनट बाद लक्षण अपने आप ठीक क्यों न हो जाएं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/children-bedwetting-causes-symptoms-and-treatment-3207222">बड़े होने के बाद भी बिस्तर पर क्यों पेशाब कर देते हैं बच्चे, हो सकती है यह बीमारी </a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन टाइम नहीं, बैठकर रहना हो सकता है बड़ी वजह</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली स्थित सीके बिरला अस्पताल के न्यूरोसाइंस विभाग के निदेशक डॉ. के.के. जिंदल के मुताबिक, स्क्रीन के सामने रहना अपने आप में स्ट्रोक का सीधा कारण साबित नहीं हुआ है. हालांकि, लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल अक्सर जिस अन एक्टिव से जुड़ा होता है, वह समय के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है. दरअसल, स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई रुक जाती है. ऐसा आमतौर पर किसी ब्लड वेसल में ब्लॉकेज या दिमाग में खून निकलने की वजह से होता है. ऑक्सीजन की कमी से दिमाग की सेल्स प्रभावित होने लगती हैं. यही वजह है कि स्ट्रोक होने पर जल्द से जल्द इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/29/5bba1a8bbff36c41bd1c2eba4667f32317932536318671257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>घंटों बैठे रहने से बढ़ सकता है खतरा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लंबे समय तक स्क्रीन देखने में चिंता की सबसे बड़ी वजह स्क्रीन नहीं, बल्कि उसके सामने घंटों बैठे रहना हो सकता है. लंबे समय तक बिना किसी शारीरिक गतिविधि के बैठे रहने से वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ये सभी स्ट्रोक के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की पत्रिका स्ट्रोक में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि 60 साल या उससे कम उम्र के ऐसे वयस्क, जो दिन में कम से कम आठ घंटे बैठे रहने वाली मनोरंजक गतिविधियों में बिताते थे और जिनकी शारीरिक गतिविधि कम थी, उनमें ज्यादा सक्रिय लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा अधिक था. हालांकि, यह शोध स्क्रीन टाइम और स्ट्रोक के बीच सीधे कारण-परिणाम को साबित नहीं करता. यह लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और स्ट्रोक के खतरे के बीच संबंध की ओर इशारा करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/29/30a75b7b3deb10a5af4c726ce300ec2517932536708931257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ स्क्रीन के घंटे देखकर खतरा नहीं समझ सकते</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले घंटों को अकेले देखकर स्ट्रोक के खतरे का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करता है, लेकिन नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसका जोखिम उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो उतने ही घंटे बैठता है और शारीरिक गतिविधि लगभग नहीं करता. लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है. खराब नींद ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक हेल्थ को कंट्रोल करना मुश्किल बना सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, ऐसी कोई तय स्क्रीन टाइम सीमा नहीं है, जिसके बाद किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होने की संभावना निश्चित रूप से बढ़ जाए. लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने का मतलब यह भी नहीं है कि व्यक्ति को स्ट्रोक होने वाला है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जिन लोगों को पहले स्ट्रोक या टीआईए हो चुका है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. इनमें ब्लड प्रेशर पर खास ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है. नियमित ब्लड प्रेशर की जांच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि लंबे समय में स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>युवाओं को भी नहीं समझना चाहिए खुद को सुरक्षित</strong></p>
<p style="text-align: justify;">युवाओं को यह नहीं मानना चाहिए कि स्ट्रोक सिर्फ उम्रदराज लोगों को होता है. उम्र बढ़ने के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, लेकिन कम उम्र में भी स्ट्रोक हो सकता है, खासकर जब कोई मेडिकल कंडीशन या दूसरे जोखिम कारक मौजूद हों.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन छोड़ने की जरूरत नहीं, बीच-बीच में चलें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना हर किसी के लिए संभव नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका काम कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर है. ऐसे में जरूरी है कि लगातार कई घंटे तक एक ही जगह बैठे रहने से बचें. बीच-बीच में उठकर चलना, फोन पर बात करते समय संभव हो तो टहलना, काम के बीच स्ट्रेचिंग करना और रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक गतिविधि शामिल करना मददगार हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">वयस्कों को हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए. इसके साथ अपनी क्षमता के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत भी की जा सकती है. संतुलित डाइट, तंबाकू से दूरी, शराब का सेवन सीमित करना और पर्याप्त नींद भी शरीर और दिमाग की सेहत के लिए जरूरी हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने से नहीं रुकेगा स्ट्रोक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने से स्ट्रोक को रोका नहीं जा सकता. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए इन स्थितियों को कंट्रोल में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/ministry-of-ayush-warns-against-overstraining-the-body-during-yoga-3207005">योग करते समय शरीर पर न डालें जोर, आयुष मंत्रालय ने दी चेतावनी</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना जरूरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना भी उतना ही जरूरी है. चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना, शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक दिखाई देने में दिक्कत, तेज असंतुलन या बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए, भले ही कुछ मिनट बाद लक्षण अपने आप ठीक क्यों न हो जाएं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/children-bedwetting-causes-symptoms-and-treatment-3207222">बड़े होने के बाद भी बिस्तर पर क्यों पेशाब कर देते हैं बच्चे, हो सकती है यह बीमारी </a></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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