सिरोही: खनन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, पंचायत चुनावों के बहिष्कार का ऐलान
Rajasthan 09 Oct 2026, 09:31 PM

सिरोही: खनन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, पंचायत चुनावों के बहिष्कार का ऐलान

ABP News
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<p style="text-align: justify;">सिरोही जिले के वाटेरा गांव में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने अब चुनाव बहिष्कार का बड़ा ऐलान कर दिया है. शुक्रवार को थम्ब बावसी मंदिर प्रांगण में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में आदिवासी समुदाय के भाई-बहनों, गांव के वरिष्ठ बुजुर्गों, नागरिकों और युवाओं की मौजूदगी में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया. </p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना निरस्त नहीं होती, तब तक वे आगामी पंचायती राज चुनावों में मतदान नहीं करेंगे. ग्रामीण 800 हेक्टेयर में प्रस्तावित खनन परियोजना का जमकर विरोध कर रहे हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ग्रामीणों का क्या कहना है?</h3>
<p style="text-align: justify;">बैठक में ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और पंच के आगामी चुनावों में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए जल, जमीन और जंगल की रक्षा सर्वोपरि है. क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को निरस्त करना उनकी प्रमुख मांग है और इस मांग पर वे किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि प्रस्तावित खनन परियोजना किसी भी सूरत में क्षेत्र में स्वीकार नहीं की जाएगी. परियोजना निरस्त होने तक वे चुनाव प्रक्रिया से दूरी बनाए रखेंगे. साथ ही, ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों का बहिष्कार करने और गांवों में उनके चुनाव प्रचार का विरोध करने की भी बात कही है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">चार ग्राम पंचायतों की जमीन पर प्रस्तावित है परियोजना</h3>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीणों के अनुसार, मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना करीब 800 हेक्टेयर भूमि पर वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रस्तावित है. ग्रामीणों को आशंका है कि परियोजना से क्षेत्र के जलस्रोतों, जमीन, जंगल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. उनका कहना है कि इससे आदिवासी समुदाय, पशुपालकों और गरीब किसानों की आजीविका पर भी संकट गहरा सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">करीब एक साल से जारी है संघर्ष</h3>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीण पिछले करीब एक वर्ष से प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं. उनका संघर्ष गांवों से लेकर जयपुर तक पहुंच चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन परियोजना निरस्त होने तक उनका विरोध जारी रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें</h3>
<p style="text-align: justify;">चुनाव बहिष्कार के ऐलान के बाद अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जल, जमीन और जंगल की रक्षा के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा. अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांग पर सरकार क्या निर्णय लेती है और प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है.</p>
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Source Credit: abplive.com
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