'किसान भूलता नहीं, BJP को हरा दिया', राहुल गांधी अब किस बात पर भड़के
05 Nov 2026, 03:58 PM

'किसान भूलता नहीं, BJP को हरा दिया', राहुल गांधी अब किस बात पर भड़के

ABP News
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<p style="text-align: justify;">महाराष्ट्र की गोकुल दूध संघ (गोकुल डेयरी) के चुनाव को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में भाजपा पर जनादेश के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को चुनाव में हरा दिया, लेकिन चुनाव के बाद नियमों में बदलाव कर बहुमत हासिल करने की कोशिश की जा रही है.</p>
<p style="text-align: justify;">राहुल गांधी ने इसे दूध उत्पादकों के वोट की चोरी और जनादेश में मिलावट करार दिया. उन्होंने भाजपा पर सत्ता बचाने के लिए हर जगह किसी भी हद तक जाने का आरोप भी लगाया.  उन्होंने कहा कि भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है. दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें - किसान भूलता नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गोकुल डेयरी चुनाव में 13-12 से जीता था कांग्रेस समर्थित पैनल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है. 19 अक्टूबर को हुए चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं. इस तरह कांग्रेस समर्थित पैनल को एक सीट के अंतर से बहुमत मिला था. गोकुल डेयरी का सालाना कारोबार करीब 4,000 करोड़ रुपये है और यह महाराष्ट्र की प्रमुख सहकारी दुग्ध संस्थाओं में शामिल है.</p>
<p><strong>महाराष्ट्र सरकार ने बदला सहकारी समितियों का नियम</strong></p>
<p>चुनाव के बाद गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर विवाद शुरू हो गया. 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनने के लिए बुलाई गई बैठक में महायुति समर्थित सभी 12 निदेशक अनुपस्थित रहे. बैठक के लिए 14 निदेशकों की मौजूदगी जरूरी थी, लेकिन कांग्रेस समर्थित पैनल के 13 निदेशक ही पहुंचे. इस कारण बैठक नहीं हो सकी.</p>
<p>इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने 10 नवंबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नई बैठक बुलाने का निर्देश दिया. इसी बीच महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में सरकार पांच सदस्यों को मनोनीत कर सकेगी. इनमें चार सदस्यों को मतदान का अधिकार मिलेगा, जबकि एक सरकारी अधिकारी मतदान नहीं कर सकेगा. </p>
<p><strong>12 से 16 हो सकता है बहुमत का गणित</strong></p>
<p>सरकार के इस फैसले को गोकुल डेयरी के चुनाव परिणाम से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस समर्थित पैनल के पास पहले से 13 निदेशक हैं, जबकि महायुति समर्थित पैनल के पास 12 सीटें हैं. यदि सरकार की ओर से नियुक्त चार मतदान अधिकार वाले निदेशक महायुति के पक्ष में जाते हैं तो उसका संख्या बल 12 से बढ़कर 16 हो सकता है. इसी गणित को लेकर राहुल गांधी ने भाजपा पर चुनाव के बाद नियम बदलकर बहुमत हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया है. हालांकि, मनोनीत निदेशकों को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा. </p>
<p><strong>कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जाने की कही बात</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्वाचित बोर्ड की संरचना बदलकर दूध उत्पादकों के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. खेड़ा के मुताबिक, कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. उनका कहना है कि चुनाव में मनचाहा परिणाम नहीं मिलने पर सरकार चुनाव के बाद नियमों में बदलाव कैसे कर सकती है. </p>
<p><strong>सरकार ने क्या दिया है तर्क?</strong></p>
<p>वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस संशोधन के पीछे बड़ी सहकारी संस्थाओं में विशेषज्ञता, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन की जरूरत बताई गई है. सरकार का तर्क है कि अधिक कारोबार और सार्वजनिक हित से जुड़ी सहकारी संस्थाओं में विशेषज्ञ सदस्यों की भागीदारी से प्रशासनिक कामकाज बेहतर हो सकता है. हालांकि, विपक्ष इस फैसले को गोकुल डेयरी के चुनावी नतीजों और अध्यक्ष पद के चुनाव से जोड़कर देख रहा है. अब इस पूरे विवाद पर 10 नवंबर को होने वाली बैठक और संभावित कानूनी चुनौती पर सबकी नजर है. </p>
Source Credit: abplive.com
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