Hanuman Janmotsav 2026: प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में पांच दिन का उत्सव शुरू, दिवाली से पहले क्यों हो रहा विशेष आयोजन?
04 Nov 2026, 07:08 PM

Hanuman Janmotsav 2026: प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में पांच दिन का उत्सव शुरू, दिवाली से पहले क्यों हो रहा विशेष आयोजन?

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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="1"><strong class="" data-path-to-node="1" data-index-in-node="0"><span class="citation-215">56 भोग, 51 किलो का महालड्डू और 1001 दीपों की महाआरती: प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में सजेगा अलौकिक दरबार</span></strong></p>
<p id="p-rc_ed473424b6d4afb6-49" style="text-align: justify;" data-path-to-node="1"><strong class="" data-path-to-node="1" data-index-in-node="0"><span class="citation-215">प्रयागराज (Prayagraj),</span></strong><span class="citation-215 citation-end-215"> संगम तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध 'श्री बड़े हनुमान मंदिर' (लेटे हुए हनुमान जी) में पांच दिवसीय श्री हनुमत जन्मोत्सव महापर्व का आगाज वैदिक अनुष्ठानों और महागणपति हवन के साथ हो चुका है.</span></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="1">बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर एवं मंदिर के महंत बलबीर गिरि के सानिध्य में पहले दिन सप्त शुद्धि, अथर्वशीर्ष महागणपति पाठ और अष्टद्रव्य हवन विधिवत संपन्न हुआ. <span class="citation-214 citation-end-214">दीपोत्सव से ठीक पहले संगम नगरी में शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है.</span></p>
<h3 class="" style="text-align: justify;" data-path-to-node="3">दिवाली से पहले ही क्यों मनाया जाता है यहां जन्मोत्सव?</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4"><span class="">जहां देश के अधिकांश हिस्सों में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है,</span><span class=""> वहीं प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली) को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है. इसके पीछे दो प्रमुख पौराणिक मान्यताएं हैं:</span></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="5,0,0"><strong data-path-to-node="5,0,0" data-index-in-node="0">वाल्मीकि रामायण की मान्यता:</strong><span class=""> धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,</span> पवनपुत्र हनुमान जी का प्राकट्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को स्वाति नक्षत्र में हुआ था. इसी कारण छोटी दिवाली के दिन बजरंगबली का जन्मोत्सव विशेष विधि-विधान से मनाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="5,1,0"><strong class="" data-path-to-node="5,1,0" data-index-in-node="0">लंका विजय और सिंदूर अर्पण की कथा:</strong><span class=""> पौराणिक आख्यानों के अनुसार,</span><span class=""> लंका में रावण और पाताल लोक में अहिरावण का संहार करने के बाद जब मारुति नंदन अत्यधिक थककर त्रिवेणी तट पर विश्राम करने पहुंचे,</span> तब माता सीता ने उन्हें आरोग्य और अमरत्व का आशीर्वाद देते हुए अपनी मांग का सिंदूर अर्पित किया था. इसी विश्राम मुद्रा वाली दुर्लभ प्रतिमा के कारण इन्हें 'लेटे हनुमान' व 'प्रयागराज के कोतवाल' के रूप में पूजा जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="7">पांच दिनों तक चलेंगे ये विशेष अनुष्ठान</h3>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="1,0,0"><strong data-path-to-node="1,0,0" data-index-in-node="0">पहला दिन (शुभारंभ):</strong> प्रातः 8:00 बजे से सप्त शुद्धि, अथर्वशीर्ष पाठ और अष्टद्रव्य हवन के साथ महापर्व का आगाज.</li>
<li data-path-to-node="1,1,0"><strong data-path-to-node="1,1,0" data-index-in-node="0">दूसरा व तीसरा दिन:</strong> दिनभर 'राम तारक मंत्र हवन' और अनवरत 'अखंड रामायण पाठ' का आयोजन.</li>
<li data-path-to-node="1,2,0"><strong data-path-to-node="1,2,0" data-index-in-node="0">चौथा दिन:</strong> सायं 5:00 बजे से संगीतमय सुंदरकांड पाठ और प्रभु को विशेष सिंदूर चोला अर्पण.</li>
<li data-path-to-node="1,3,0"><strong data-path-to-node="1,3,0" data-index-in-node="0">पांचवां दिन (मुख्य पर्व):</strong> महाभिषेक, 56 व्यंजनों का महाभोग, 1001 दीपों की भव्य महाआरती और रात्रि जागरण.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="2"><strong data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम:</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="3,0,0">श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर और संगम तट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. दूर-दराज से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए सुव्यवस्थित बैरिकेडिंग और अलग-अलग प्रवेश-निकास द्वार बनाए गए हैं.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="9"><span class="citation-212 citation-end-212"><span class=""><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></span></span></p>
Source Credit: abplive.com
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