21 Sep 2026, 01:35 PM
नेहरू युग का फैसला, जब तिब्बत से वापस लौटी भारतीय सेना, इंडिया ने कैसे खोया रणनीतिक पैर जमाने का मौका?
Patrika
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आजादी के समय भारत को अंग्रेजों से तिब्बत में कुछ विशेषाधिकार विरासत में मिले थे। भारत को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में एक मिशन रखने का अधिकार, ग्यांत्से और यातुंग में सैन्य एस्कॉर्ट, व्यापारिक एजेंसियां, डाक-बंगले और टेलीग्राफ लाइनें मिली थी। लिहाजा, तिब्बत में भारतीय प्रशासनिक दस्ते की मौजूदगी भारत की एकमात्र ठोस रणनीतिक चौकी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद परस्थितियां पूरी तरह से बदल गईं। 1949 में चीन में साम्यवादी क्रांति की वजह से च्यांग काई-शेक की राष्ट्रवादी सरकार बेदखल हो गई। माओ के नेतृत्व में नया निजाम कायम हुआ। इसके बाद कम्युनिस्ट चीन की नजर तिब्बत पर पड़ी।
Source Credit: patrika.com
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