09 Sep 2026, 02:50 PM
Mirzapur Dialogue: ‘कालीन भैया’ की भाषा का अलग ही भौकाल है, डॉन का डायलॉग है या ‘बाबा’ का प्रवचन
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मिर्जापुर में हिंसा की अपनी भाषा है लेकिन पंकज त्रिपाठी की भाषा चरम पर है. एक तरफ गोलियों की गर्जना तो दूसरी तरफ विशुद्ध साहित्यिक हिंदी. हिंसा के साथ ठहराव वाले उनके संवाद में भी कम भौकाल नहीं है.
Source Credit: tv9hindi.com
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