18 Oct 2026, 11:48 PM
महाअष्टमी की अंजलि सुबह जल्दी क्यों देनी होगी? संधि पूजा छूट जाए तो क्या करें?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">19 अक्टूबर को महाअष्टमी पर अंजलि देने जाने से पहले अपने पंडाल का समय जरूर जान लें. इस बार अष्टमी सुबह समाप्त हो रही है, लेकिन अलग-अलग पंचांगों के कारण पूजा की समय-सारिणी में अंतर है.</p>
<p style="text-align: justify;">महाअष्टमी पर सुबह तैयार होकर मां दुर्गा को फूल चढ़ाने की तैयारी है तो पंडाल पहुंचने का समय आज ही पता कर लें. सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी तिथि सुबह ही समाप्त हो जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए देर से पहुंचने पर आपके पंडाल की निर्धारित अष्टमी पुष्पांजलि छूट सकती है. हालांकि, अंजलि के लिए पूरे देश में एक ही समय तय नहीं है. संबंधित पूजा समिति जिस पंचांग और परंपरा का पालन करती है, उसका कार्यक्रम देखना जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अष्टमी कब तक रहेगी, संधि पूजा कितने बजे है?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी. नई दिल्ली और कोलकाता के लिए संधि पूजा का समय सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक दिया गया है. सभी समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन कुछ बंगाली पंचांगों पर आधारित कार्यक्रम इससे पहले के हैं. अष्टमी समाप्ति सुबह 7:50 बजे और संधि पूजा सुबह 7:26 से 8:14 बजे तक बताई गई है. इस अंतर को सिर्फ शहर बदलने का अंतर समझना गलत होगा. पंचांग की गणना-पद्धति भी अलग हो सकती है. इसलिए इंटरनेट से मिला कोई समय अपने पंडाल पर सीधे लागू न करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">फिर अंजलि के लिए जल्दी क्यों पहुंचें?</h3>
<p style="text-align: justify;">पुष्पांजलि में श्रद्धालु पुरोहित के साथ मंत्र बोलते हुए देवी को फूल अर्पित करते हैं. सामूहिक पूजा में इसके कई दौर हो सकते हैं. इसके अलावा मुख्य पूजा और दूसरे अनुष्ठानों का भी निर्धारित क्रम रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;">जहां अष्टमी की पूजा सुबह जल्दी पूरी की जा रही है, वहां देर से पहुंचने पर अंजलि का अवसर निकल सकता है. व्यावहारिक तरीका यही है कि पूजा समिति से अंजलि के पहले और आखिरी दौर का समय पूछ लें. केवल अष्टमी समाप्त होने का समय देखकर घर से निकलना पर्याप्त नहीं है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">संधि पूजा का मतलब शाम की पूजा नहीं</h3>
<p style="text-align: justify;">नाम में संधि होने से इसे शाम की पूजा समझने की भूल न करें. यहां संधि का अर्थ अष्टमी और नवमी का मिलन है. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट मिलाकर यह विशेष अवधि बनती है. इसीलिए संधि पूजा दिन या रात, जिस समय यह संधिकाल पड़े, उसी समय होती है.</p>
<p style="text-align: justify;">पुष्पांजलि और संधि पूजा भी अलग अनुष्ठान हैं. सुबह अंजलि देने का समय और संधि पूजा शुरू होने का समय एक मानकर न चलें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">संधि पूजा का समय निकल जाए तो क्या करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">संधिकाल निकल जाने के बाद शाम को की गई सामान्य पूजा को उसी मुहूर्त की संधि पूजा नहीं कहा जा सकता. लेकिन इससे देवी के दर्शन, फूल अर्पित करने, प्रार्थना या आरती में शामिल होने का अवसर समाप्त नहीं होता.</p>
<p style="text-align: justify;">पंडाल देर से पहुंचें तो वहां चल रहे अनुष्ठान की जानकारी लें और पुरोहित के निर्देश के अनुसार भाग लें. घर पर मां दुर्गा को फूल अर्पित करके प्रार्थना कर सकते हैं. यदि आपने किसी विशेष अनुष्ठान का संकल्प लिया था, तो उसके अधूरे रहने पर अपनी परंपरा के पुरोहित से आगे की विधि पूछें.</p>
<p style="text-align: justify;">संधि पूजा छूटने को अपने-आप अनिष्ट का संकेत मानने का आधार नहीं है. जरूरी बात निर्धारित समय की सही जानकारी है, और उसके लिए आपके पंडाल की घोषित समय-सारिणी सबसे पहले देखी जानी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">महाअष्टमी पर सुबह तैयार होकर मां दुर्गा को फूल चढ़ाने की तैयारी है तो पंडाल पहुंचने का समय आज ही पता कर लें. सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी तिथि सुबह ही समाप्त हो जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए देर से पहुंचने पर आपके पंडाल की निर्धारित अष्टमी पुष्पांजलि छूट सकती है. हालांकि, अंजलि के लिए पूरे देश में एक ही समय तय नहीं है. संबंधित पूजा समिति जिस पंचांग और परंपरा का पालन करती है, उसका कार्यक्रम देखना जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अष्टमी कब तक रहेगी, संधि पूजा कितने बजे है?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी. नई दिल्ली और कोलकाता के लिए संधि पूजा का समय सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक दिया गया है. सभी समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन कुछ बंगाली पंचांगों पर आधारित कार्यक्रम इससे पहले के हैं. अष्टमी समाप्ति सुबह 7:50 बजे और संधि पूजा सुबह 7:26 से 8:14 बजे तक बताई गई है. इस अंतर को सिर्फ शहर बदलने का अंतर समझना गलत होगा. पंचांग की गणना-पद्धति भी अलग हो सकती है. इसलिए इंटरनेट से मिला कोई समय अपने पंडाल पर सीधे लागू न करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">फिर अंजलि के लिए जल्दी क्यों पहुंचें?</h3>
<p style="text-align: justify;">पुष्पांजलि में श्रद्धालु पुरोहित के साथ मंत्र बोलते हुए देवी को फूल अर्पित करते हैं. सामूहिक पूजा में इसके कई दौर हो सकते हैं. इसके अलावा मुख्य पूजा और दूसरे अनुष्ठानों का भी निर्धारित क्रम रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;">जहां अष्टमी की पूजा सुबह जल्दी पूरी की जा रही है, वहां देर से पहुंचने पर अंजलि का अवसर निकल सकता है. व्यावहारिक तरीका यही है कि पूजा समिति से अंजलि के पहले और आखिरी दौर का समय पूछ लें. केवल अष्टमी समाप्त होने का समय देखकर घर से निकलना पर्याप्त नहीं है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">संधि पूजा का मतलब शाम की पूजा नहीं</h3>
<p style="text-align: justify;">नाम में संधि होने से इसे शाम की पूजा समझने की भूल न करें. यहां संधि का अर्थ अष्टमी और नवमी का मिलन है. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट मिलाकर यह विशेष अवधि बनती है. इसीलिए संधि पूजा दिन या रात, जिस समय यह संधिकाल पड़े, उसी समय होती है.</p>
<p style="text-align: justify;">पुष्पांजलि और संधि पूजा भी अलग अनुष्ठान हैं. सुबह अंजलि देने का समय और संधि पूजा शुरू होने का समय एक मानकर न चलें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">संधि पूजा का समय निकल जाए तो क्या करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">संधिकाल निकल जाने के बाद शाम को की गई सामान्य पूजा को उसी मुहूर्त की संधि पूजा नहीं कहा जा सकता. लेकिन इससे देवी के दर्शन, फूल अर्पित करने, प्रार्थना या आरती में शामिल होने का अवसर समाप्त नहीं होता.</p>
<p style="text-align: justify;">पंडाल देर से पहुंचें तो वहां चल रहे अनुष्ठान की जानकारी लें और पुरोहित के निर्देश के अनुसार भाग लें. घर पर मां दुर्गा को फूल अर्पित करके प्रार्थना कर सकते हैं. यदि आपने किसी विशेष अनुष्ठान का संकल्प लिया था, तो उसके अधूरे रहने पर अपनी परंपरा के पुरोहित से आगे की विधि पूछें.</p>
<p style="text-align: justify;">संधि पूजा छूटने को अपने-आप अनिष्ट का संकेत मानने का आधार नहीं है. जरूरी बात निर्धारित समय की सही जानकारी है, और उसके लिए आपके पंडाल की घोषित समय-सारिणी सबसे पहले देखी जानी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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