Lal Bahadur Shastri Jayanti: अगर नाव पार चली जाती, तो देश को कैसे मिलते लाल बहादुर शास्त्री?
02 Oct 2026, 04:16 PM

Lal Bahadur Shastri Jayanti: अगर नाव पार चली जाती, तो देश को कैसे मिलते लाल बहादुर शास्त्री?

Patrika
@patrika
Lal Bahadur Shastri Childhood Story: अगर उस दिन ‘नन्हे’ दूधवाले के पास ही रह जाता, माता-पिता उसे खोज नहीं पाते, तो देश एक महान नेता के शौर्य, पराक्रम से वंचित रह जाता- वे नेता थे लाल बहादुर शास्त्री। किताब ‘BUILDERS OF MODERN INDIA: LAL BAHADUR SHASTRI’ में डी.आर.मानकेकर ने इस बारे में विस्तार से बताया गया है। 14 फरवरी 1905 को प्रयाग (प्रयागराज) में मकर संक्रांति के अवसर पर माघ मेले की धूम थी। गंगा के किनारे हजारों श्रद्धालु डुबकी लगाने के लिए जमा हुए थे। भीड़ के धक्कों और आपाधापी के बीच एक युवा जोड़ा खुद को संभालने की कोशिश कर रहा -शारदा प्रसाद और उनकी कम उम्र की पत्नी रामदुलारी देवी; रामदुलारी देवी ने अपनी गोद में चार महीने के बच्चे को कसकर पकड़ रखा था। तभी एक जोर का धक्का लगा और रामदुलारी देवी नीचे गिर पड़ीं। उनके हाथ से बच्चा छूट गया, जैसे ही उन्होंने होश संभाला, बच्चे को पास न देखकर घबरा गईं।
Source Credit: patrika.com
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