06 Nov 2026, 08:53 PM
बीमार हाथी के बच्चे 'माया' को इलाज के लिए केरल से 'वनतारा' एयरलिफ्ट किया गया
ABP News
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<p style="text-align: justify;">कई फ्रैक्चर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ केरल के 18 महीने के हाथी के बच्चे माया को अभयारण्यम से गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा में बेहतर इलाज के लिए भेज दिया गया है. केरल के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ. पी. पुगाझेंडी (IFS) ने पशु चिकित्सा एक्सपर्ट्स से सलाह-मशवरा के बाद 5 नवंबर 2026 को उसे ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया था. यह फैसला तब लिया गया, जब केरल वन विभाग की तरफ से महीनों तक इलाज किया गया. इसके अलावा 24 घंटे देखभाल करने के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था.&nbsp;<br />&nbsp;<br />माया को वनतारा में इंटेंसिव केयर दी जाएगी, जहां वेटनरी डॉक्टर की एक टीम उसकी स्थिति का आकलन करेगी. इसके अलावा आगे के इलाज के ऑप्शन पर विचार करेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>माया को मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मलयत्तूर डिवीजन के काप्रिक्काड के पास माया 19 अप्रैल 2025 को माया अकेली मिली थी. उसका झुंड एक नदी पार कर गया था. वह पीछे छूट गई थी. बच्चा बहुत कमजोर था. उसे गंभीर डिहाइड्रेशन था. उसे अपनी मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया था.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, जब उसकी मां वापस नहीं लौटी तो वन विभाग ने उसे बचाया और अभयारण्यम ले आए. चूंकि माया नेचुरल तरीके से दूध नहीं पी सकती थी इसलिए वन अधिकारियों ने उसकी चौबीसों घंटे देखभाल की व्यवस्था की.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खेलते-खेलते गिर गई माया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">माया की देखभाल के लिए सहायक फोरेस्ट वेटनरी डॉक्टर ऑफिसर डॉ. बिनॉय सी. बाबू, वन कर्मचारियों की टीम ने काफी मेहनत की. इस दौरान पहले 1 साल तक माया को लगातार इलाज मिलता रहा. हालांकि, बीते 2 जुलाई 2026 को खेलते समय माया गिर गई थी. उसका दाहिने कंधा चोटिल हो गया था. इस वजह से उसकी स्थिति खराब हो गई थी. हालांकि, इस दौरान उसका लगातार इलाज किया गया. फिजियोथेरेपी और ग्रोथ संबंधी सप्लीमेंट्स देने के बावजूद, उसके हेल्थ में सुधार नहीं आ रहा था. अक्टूबर के आखिरी महीने तक उसे खड़े होने भी दिक्कत आने लगी. इस दौरान वह केवल लिक्विड मील ही ले पा रही थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वनतारा भेजने की एक्सपर्ट ने दी सलाह</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पूकोड स्थित कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के डॉ. दिनेश पी.टी. ने 24 अक्टूबर को माया की जांच की. रिपोर्ट चिंताजनक निकली. माया के शरीर में &nbsp;कई फ्रैक्चर, हड्डियों की गंभीर कमजोरी, छाती में संक्रमण और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण शरीर पर घाव हो गए. डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया गया. इसके बाद एक्सपर्ट्स ने वनतारा भेजने की सलाह दी. इलाज के अन्य ऑप्शन की तलाश में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने 1 नवंबर को वनतारा की वेटनरी टीम के साथ बात-विचार किया गया. टीम ने माया के मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे और ब्लड रिपोर्ट की जांच की.</p>
<p style="text-align: justify;">4 नवंबर को एक मेडिकल बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें वन विभाग के अधिकारी और असम के एलीफेंट स्पेशलिस्ट एनिमल डॉक्टर और वनतारा के एनिमल डॉक्टर कंसलटेंट पद्म श्री डॉ. कुशल कोंवर सरमा शामिल हुए. डॉ. सरमा ने संभावित समस्या की पहचान की, जिसका इलाज संभव है.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने माया को विशेष देखभाल के लिए वनतारा भेजने की सिफारिश की. वनतारा के एलीफेंट केयर सेंटर के प्रमुख एनिमल डॉक्टर, डॉ. यदुराज खाडपेकर ने भी इस सिफारिश का समर्थन किया. मेडिकल बोर्ड ने सर्वसम्मति से माया को वहां भेजने पर सहमति जताई और अगले दिन 5 नवंबर को इसके आदेश जारी कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वनतारा ने की एयरलिफ्ट समेत कई तरह की सुविधा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">वनतारा ने माया को शिफ्ट करने के लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था की गई, जिसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम और मेडिकल टीम मौजूद थी. हाथियों के तीन डॉक्टर, पैरा-वेट्स और देखभाल करने वाले लोग माया के साथ थे. उनके पास &nbsp;दवाएं और जरूरी उपकरण भी मौजूद थे. केरल वन विभाग भी सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनॉय सी. बाबू और माया के परिचित देखभालकर्ता, निखिल बाबू को साथ भेजा है, ताकि उसकी देखभाल में कोई रुकावट न आए.</p>
<p style="text-align: justify;">वनतारा में माया को 24 घंटे पशु चिकित्सा देखभाल और आगे के जरूरी मेडिकल टेस्ट की सुविधा मिलेगी. स्पेशल मशीन &nbsp;की मदद से टीम उसे सुरक्षित रूप से इधर-उधर ले जा सकेगी और सही स्थिति में रख सकेगी. साथ ही, उसकी हालत को देखते हुए अन्य तरह के ट्रिटमेंट पर भी विचार किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">केरल की एक जांच समिति बनाई गई है. इसकी अध्यक्षता कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, सोशल फॉरेस्ट्री, सेंट्रल रीजन करेंगे. ये इलाज के दौरान माया के हेल्थ की समीक्षा करेगी. इलाज पूरा होने के बाद, वनतारा माया की अभयारण्यम वापसी में मदद करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि उसके स्वास्थ्य को लेकर अभी कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस उसके वनतारा से विशेषज्ञों को इलाज के अन्य विकल्पों पर विचार करने का मौका मिलेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>माया को मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मलयत्तूर डिवीजन के काप्रिक्काड के पास माया 19 अप्रैल 2025 को माया अकेली मिली थी. उसका झुंड एक नदी पार कर गया था. वह पीछे छूट गई थी. बच्चा बहुत कमजोर था. उसे गंभीर डिहाइड्रेशन था. उसे अपनी मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया था.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, जब उसकी मां वापस नहीं लौटी तो वन विभाग ने उसे बचाया और अभयारण्यम ले आए. चूंकि माया नेचुरल तरीके से दूध नहीं पी सकती थी इसलिए वन अधिकारियों ने उसकी चौबीसों घंटे देखभाल की व्यवस्था की.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खेलते-खेलते गिर गई माया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">माया की देखभाल के लिए सहायक फोरेस्ट वेटनरी डॉक्टर ऑफिसर डॉ. बिनॉय सी. बाबू, वन कर्मचारियों की टीम ने काफी मेहनत की. इस दौरान पहले 1 साल तक माया को लगातार इलाज मिलता रहा. हालांकि, बीते 2 जुलाई 2026 को खेलते समय माया गिर गई थी. उसका दाहिने कंधा चोटिल हो गया था. इस वजह से उसकी स्थिति खराब हो गई थी. हालांकि, इस दौरान उसका लगातार इलाज किया गया. फिजियोथेरेपी और ग्रोथ संबंधी सप्लीमेंट्स देने के बावजूद, उसके हेल्थ में सुधार नहीं आ रहा था. अक्टूबर के आखिरी महीने तक उसे खड़े होने भी दिक्कत आने लगी. इस दौरान वह केवल लिक्विड मील ही ले पा रही थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वनतारा भेजने की एक्सपर्ट ने दी सलाह</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पूकोड स्थित कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के डॉ. दिनेश पी.टी. ने 24 अक्टूबर को माया की जांच की. रिपोर्ट चिंताजनक निकली. माया के शरीर में &nbsp;कई फ्रैक्चर, हड्डियों की गंभीर कमजोरी, छाती में संक्रमण और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण शरीर पर घाव हो गए. डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया गया. इसके बाद एक्सपर्ट्स ने वनतारा भेजने की सलाह दी. इलाज के अन्य ऑप्शन की तलाश में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने 1 नवंबर को वनतारा की वेटनरी टीम के साथ बात-विचार किया गया. टीम ने माया के मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे और ब्लड रिपोर्ट की जांच की.</p>
<p style="text-align: justify;">4 नवंबर को एक मेडिकल बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें वन विभाग के अधिकारी और असम के एलीफेंट स्पेशलिस्ट एनिमल डॉक्टर और वनतारा के एनिमल डॉक्टर कंसलटेंट पद्म श्री डॉ. कुशल कोंवर सरमा शामिल हुए. डॉ. सरमा ने संभावित समस्या की पहचान की, जिसका इलाज संभव है.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने माया को विशेष देखभाल के लिए वनतारा भेजने की सिफारिश की. वनतारा के एलीफेंट केयर सेंटर के प्रमुख एनिमल डॉक्टर, डॉ. यदुराज खाडपेकर ने भी इस सिफारिश का समर्थन किया. मेडिकल बोर्ड ने सर्वसम्मति से माया को वहां भेजने पर सहमति जताई और अगले दिन 5 नवंबर को इसके आदेश जारी कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वनतारा ने की एयरलिफ्ट समेत कई तरह की सुविधा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">वनतारा ने माया को शिफ्ट करने के लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था की गई, जिसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम और मेडिकल टीम मौजूद थी. हाथियों के तीन डॉक्टर, पैरा-वेट्स और देखभाल करने वाले लोग माया के साथ थे. उनके पास &nbsp;दवाएं और जरूरी उपकरण भी मौजूद थे. केरल वन विभाग भी सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनॉय सी. बाबू और माया के परिचित देखभालकर्ता, निखिल बाबू को साथ भेजा है, ताकि उसकी देखभाल में कोई रुकावट न आए.</p>
<p style="text-align: justify;">वनतारा में माया को 24 घंटे पशु चिकित्सा देखभाल और आगे के जरूरी मेडिकल टेस्ट की सुविधा मिलेगी. स्पेशल मशीन &nbsp;की मदद से टीम उसे सुरक्षित रूप से इधर-उधर ले जा सकेगी और सही स्थिति में रख सकेगी. साथ ही, उसकी हालत को देखते हुए अन्य तरह के ट्रिटमेंट पर भी विचार किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">केरल की एक जांच समिति बनाई गई है. इसकी अध्यक्षता कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, सोशल फॉरेस्ट्री, सेंट्रल रीजन करेंगे. ये इलाज के दौरान माया के हेल्थ की समीक्षा करेगी. इलाज पूरा होने के बाद, वनतारा माया की अभयारण्यम वापसी में मदद करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि उसके स्वास्थ्य को लेकर अभी कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस उसके वनतारा से विशेषज्ञों को इलाज के अन्य विकल्पों पर विचार करने का मौका मिलेगा.</p>
Source Credit: abplive.com
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