06 Oct 2026, 02:12 PM
इंदिरा एकादशी का पारण कल सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक, क्या खाकर खोलें व्रत?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Indira Ekadashi Parana 2026:</strong> आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पितृपक्षीय इंदिरा एकादशी का व्रत आज पूरे विधि-विधान से रखा जा रहा है. शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का जितना महत्व उपवास रखने का है, उतना ही बड़ा महत्व उसके पारण यानी व्रत खोलने का भी माना गया है.</p>
<p style="text-align: justify;">यदि पारण सही समय और शास्त्रीय नियमों के अनुसार न किया जाए, तो पूरे व्रत का पुण्य फल अधूरा रह जाता है. अगर आपने भी आज यह पावन व्रत रखा है, तो कल सुबह पारण का सही समय और नियम जरूर जान लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">नोट कर लें पारण का सटीक समय और शुभ मुहूर्त</h3>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=4hCdLgU_tWSQwTaU" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले और सूर्योदय के बाद किया जाता है. कल यानी 7 अक्टूबर 2026 को पारण के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त रहेगा. पंचांग के अनुसार, व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">श्रद्धालुओं को 2 घंटे 21 मिनट की यह अवधि मिलेगी, जिसके भीतर पारण संपन्न कर लेना श्रेष्ठ माना गया है. कल द्वादशी तिथि रात 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">हरिवासर में भूलकर भी न करें व्रत खोलने की गलती</h3>
<p style="text-align: justify;">पारण के संदर्भ में शास्त्रों का एक कड़ा नियम यह है कि हरिवासर की अवधि के दौरान कभी भी व्रत नहीं खोलना चाहिए. द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को हरिवासर कहा जाता है और इसमें भोजन करना वर्जित होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">राहत की बात यह है कि कल सुबह सूर्योदय से पहले ही हरिवासर समाप्त हो जाएगा. इसलिए सुबह 06 बजकर 17 मिनट पर सूर्योदय होते ही पारण का शुभ समय आरंभ हो जाएगा और आप बिना किसी संशय के सुबह 08 बजकर 38 मिनट से पहले अपना व्रत खोल सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पारण की थाली में क्या होना चाहिए और क्या नहीं</h3>
<p style="text-align: justify;">उपवास के बाद भोजन ग्रहण करते समय कुछ खास सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं. सुबह स्नान और भगवान श्रीहरि विष्णु की धूप-दीप से पूजा करने के बाद सबसे पहले तुलसी दल और गंगाजल या चरणामृत ग्रहण करके पारण का संकल्प पूरा करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित होता है, लेकिन द्वादशी को पारण के समय थाली में चावल और सुपाच्य सात्विक भोजन शामिल करना अनिवार्य माना गया है. पारण के दिन प्याज, लहसुन, मसूर की दाल, बैंगन या ज्यादा तेल-मसालेदार चीजों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पितृपक्ष में पारण से पहले ये काम करना न भूलें</h3>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि इंदिरा एकादशी पितरों की मुक्ति और शांति से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए स्वयं अन्न ग्रहण करने से पहले कुछ पुण्य कर्म करना आवश्यक है. अपने भोजन से पहले पहली रोटी या ग्रास गाय माता के लिए अलग निकालें.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को कच्चा सीधा और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दें. अंत में तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने ज्ञात और अज्ञात पितरों की शांति के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, तभी एकादशी का व्रत पूर्ण फलदायी बनता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यदि पारण सही समय और शास्त्रीय नियमों के अनुसार न किया जाए, तो पूरे व्रत का पुण्य फल अधूरा रह जाता है. अगर आपने भी आज यह पावन व्रत रखा है, तो कल सुबह पारण का सही समय और नियम जरूर जान लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">नोट कर लें पारण का सटीक समय और शुभ मुहूर्त</h3>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=4hCdLgU_tWSQwTaU" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले और सूर्योदय के बाद किया जाता है. कल यानी 7 अक्टूबर 2026 को पारण के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त रहेगा. पंचांग के अनुसार, व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">श्रद्धालुओं को 2 घंटे 21 मिनट की यह अवधि मिलेगी, जिसके भीतर पारण संपन्न कर लेना श्रेष्ठ माना गया है. कल द्वादशी तिथि रात 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">हरिवासर में भूलकर भी न करें व्रत खोलने की गलती</h3>
<p style="text-align: justify;">पारण के संदर्भ में शास्त्रों का एक कड़ा नियम यह है कि हरिवासर की अवधि के दौरान कभी भी व्रत नहीं खोलना चाहिए. द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को हरिवासर कहा जाता है और इसमें भोजन करना वर्जित होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">राहत की बात यह है कि कल सुबह सूर्योदय से पहले ही हरिवासर समाप्त हो जाएगा. इसलिए सुबह 06 बजकर 17 मिनट पर सूर्योदय होते ही पारण का शुभ समय आरंभ हो जाएगा और आप बिना किसी संशय के सुबह 08 बजकर 38 मिनट से पहले अपना व्रत खोल सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पारण की थाली में क्या होना चाहिए और क्या नहीं</h3>
<p style="text-align: justify;">उपवास के बाद भोजन ग्रहण करते समय कुछ खास सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं. सुबह स्नान और भगवान श्रीहरि विष्णु की धूप-दीप से पूजा करने के बाद सबसे पहले तुलसी दल और गंगाजल या चरणामृत ग्रहण करके पारण का संकल्प पूरा करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित होता है, लेकिन द्वादशी को पारण के समय थाली में चावल और सुपाच्य सात्विक भोजन शामिल करना अनिवार्य माना गया है. पारण के दिन प्याज, लहसुन, मसूर की दाल, बैंगन या ज्यादा तेल-मसालेदार चीजों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पितृपक्ष में पारण से पहले ये काम करना न भूलें</h3>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि इंदिरा एकादशी पितरों की मुक्ति और शांति से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए स्वयं अन्न ग्रहण करने से पहले कुछ पुण्य कर्म करना आवश्यक है. अपने भोजन से पहले पहली रोटी या ग्रास गाय माता के लिए अलग निकालें.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को कच्चा सीधा और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा दें. अंत में तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने ज्ञात और अज्ञात पितरों की शांति के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, तभी एकादशी का व्रत पूर्ण फलदायी बनता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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