25 Oct 2026, 10:04 PM
आतंकवाद-दुनिया में जारी युद्ध पर बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर, ' हम मूक दर्शक बनकर...'
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री एस जयशंकर ने युद्ध को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा है कि कहीं भी होने वाला युद्ध हर जगह शांति के लिए खतरा है. उन्होंने यूक्रेन और मीडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर भी चिंता जाहिर की और इससे पड़ने वाले दुनिया पर व्यापक असर को लेकर अपनी बात रखी है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने भारत का यह रुख दोहाराया कि संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र तरीका बातचीत और कूटनीति है. इस दौरान उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले और पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़ी जंग का जिक्र किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं. यूक्रेन में और पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व में, ऐसे समाज, अर्थव्यवस्थाएं और लोग, जिनका इन मामलों से कोई लेना देना नहीं है, असल में उन्हें ही इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हम असहाय होकर केवल तमाशा नहीं देख सकते: विदेश मंत्री</strong></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता. भारत इन संघर्षों को सुलझाने के लिए अपने स्तर पर कोशिश कर रहा है. शांति बहाल करने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एस जयशंकर ने आगे कहा कि हम असहाय होकर केवल तमाशा नहीं देख सकते. जब हम यह कहते हैं कि बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र समाधान है, तो भारत दुनिया की भावनाओं को ही व्यक्त कर रहा है. हम खुद भी कोशिश कर रहे हैं. इस दिशा में अन्य साझेदारों के साथ मिल करने काम करने के लिए तैयार हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>'आतंकवाद का इस तरह इस्तेमाल अस्वीकार्य'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल राज्य की नीति के एक साधन के रूप में करना, बिल्कुल अस्वीकार्य है. इसे न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही इसके लिए कोई तर्क दिया जा सकता है. आतंकवाद शांति के लिए एक और घातक खतरा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि आतंकवाद इसलिए खतरा बना हुआ है, क्योंकि सभी देश इस पर जीरो टॉलरेंस नहीं अपनाते हैं. इतिहास में इतने सबक मिलने के बावजूद कुछ लोग अभी भी राजनीतिक नफे नुकसान को ज्यादा अहमियत देते हैं. उन्होंने सभी देशों से इस मुद्दे पर एकजुटता जाहिर करने की अपील की है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने भारत का यह रुख दोहाराया कि संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र तरीका बातचीत और कूटनीति है. इस दौरान उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले और पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़ी जंग का जिक्र किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं. यूक्रेन में और पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व में, ऐसे समाज, अर्थव्यवस्थाएं और लोग, जिनका इन मामलों से कोई लेना देना नहीं है, असल में उन्हें ही इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हम असहाय होकर केवल तमाशा नहीं देख सकते: विदेश मंत्री</strong></p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता. भारत इन संघर्षों को सुलझाने के लिए अपने स्तर पर कोशिश कर रहा है. शांति बहाल करने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एस जयशंकर ने आगे कहा कि हम असहाय होकर केवल तमाशा नहीं देख सकते. जब हम यह कहते हैं कि बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र समाधान है, तो भारत दुनिया की भावनाओं को ही व्यक्त कर रहा है. हम खुद भी कोशिश कर रहे हैं. इस दिशा में अन्य साझेदारों के साथ मिल करने काम करने के लिए तैयार हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>'आतंकवाद का इस तरह इस्तेमाल अस्वीकार्य'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल राज्य की नीति के एक साधन के रूप में करना, बिल्कुल अस्वीकार्य है. इसे न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही इसके लिए कोई तर्क दिया जा सकता है. आतंकवाद शांति के लिए एक और घातक खतरा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि आतंकवाद इसलिए खतरा बना हुआ है, क्योंकि सभी देश इस पर जीरो टॉलरेंस नहीं अपनाते हैं. इतिहास में इतने सबक मिलने के बावजूद कुछ लोग अभी भी राजनीतिक नफे नुकसान को ज्यादा अहमियत देते हैं. उन्होंने सभी देशों से इस मुद्दे पर एकजुटता जाहिर करने की अपील की है.&nbsp;</p>
Source Credit: abplive.com
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