नेहा बोरा पहुंचीं हाई कोर्ट, दिल्ली पुलिस के नोटिस को दी चुनौती
19 Oct 2026, 11:28 PM

नेहा बोरा पहुंचीं हाई कोर्ट, दिल्ली पुलिस के नोटिस को दी चुनौती

ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है. नोटिस में उनसे जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने के लिए कहा गया है. इसी को बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है.</p>
<p style="text-align: justify;">बोरा की कानूनी टीम के अनुसार, वे वेकेशन बेंच (छुट्टियों के दौरान बैठने वाली पीठ) के समक्ष इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे हैं. साथ ही AISA का आरोप है कि दिल्ली पुलिस द्वारा 16 अक्टूबर को हुई हिरासत के बाद मिली रिहाई के बाद से सादे कपड़ों में नेहा का पीछा किया जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस नेहा को डराने की कोशिश कर रही है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया था </strong></p>
<p style="text-align: justify;">शुक्रवार (16 अक्टूबर 2026) की शाम कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने के दौरान दिल्ली पुलिस ने बोरा को मंडी हाउस के पास से हिरासत में ले लिया था. बाद में, अगली सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अभिजीत दीपके को बॉन्ड साइन करवाकर किया गया रिहा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था. हिरासत में लेने के लिए पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका का हवाला दिया था. रविवार (18 अक्टूबर 2026) शाम को स्पेशल एग्जीक्यूटिव (SEM) कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>SIR प्रक्रिया पर हो रहा विरोध</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विपक्षी दल, छात्र समूह और सिविल सोसाइटी के लोग SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका के खिलाफ विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान SIR प्रक्रिया से कई सही मतदाताओं के मताधिकार छिनने का खतरा है. इसी को लेकर पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>न्यायिक हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका </strong></p>
<p style="text-align: justify;">सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका  को 10 अक्तूबर 2026 को <a title="जंतर-मंतर" href="https://www.abplive.com/topic/jantar-mantar" data-type="interlinkingkeywords">जंतर-मंतर</a> पर होने वाले प्रोटेस्ट से पहले भी हिरासत में लिया गया था. जहां दीपके और उनके साथियों को पर्सनल बॉन्ड साइन करवा कर रिहा कर दिया था.</p>
<p style="text-align: justify;">बाद में, सौरव दास और आहुतोष रांका 13 अक्टूबर जब फिर से जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट के लिए पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. जहां बॉन्ड का हवाला देते हुए SEM कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था.</p>
Source Credit: abplive.com
Read Full Story
2

Comments (0)

Login to join the conversation