Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर कैसे बनती है चांदी की स्याहू माला? जानें पूजा सामग्री, आरती और व्रत के जरूरी नियम
30 Oct 2026, 11:48 PM

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर कैसे बनती है चांदी की स्याहू माला? जानें पूजा सामग्री, आरती और व्रत के जरूरी नियम

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Ahoi Ashtami 2026: </strong>कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत हर माँ के लिए बेहद खास होता है. यह पवित्र व्रत संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना से रखा जाता है. </p>
<p style="text-align: justify;">इस व्रत की पूजा में चांदी की स्याहू (सेई) और चांदी के दानों की माला का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे संतान का अभेद्य सुरक्षा कवच माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/HT0bHTAjhV8" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या है चांदी की स्याहू माला और इसका महत्व?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अहोई अष्टमी की पूजा में चांदी के एक पेंडेंट का उपयोग होता है, जिस पर अहोई माता और स्याहू (सेई) के बच्चों का चित्र अंकित रहता है. इसे स्थानीय परंपराओं में 'स्याहू' कहा जाता है. </p>
<p style="text-align: justify;">इस पेंडेंट को लाल या कलावा के धागे में चांदी के गोल दानों (मनकों) के साथ पिरोकर एक विशेष माला बनाई जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्याहू की माला मां और संतान के बीच के अटूट रिश्ते और सुरक्षा का प्रतीक है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्याहू माला पिरोने और धारण करने के जरूरी नियम:</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हर साल दाने जोड़ना:</strong> पहली बार व्रत शुरू करते समय चांदी की स्याहू के साथ दो चांदी के दाने पिरोए जाते हैं. इसके बाद हर साल संतान के नाम पर 2-2 नए दाने इस माला में जुड़ते चले जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नई माताओं के लिए नियम:</strong> घर में संतान प्राप्ति होने या बेटे के विवाह के बाद पहली बार व्रत रखने पर नई <a title="चांदी" href="https://www.abplive.com/silver-prices" data-type="interlinkingkeywords">चांदी</a> की स्याहू और दाने लाए जाते हैं. इसे कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर विधिपूर्वक धारण किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>माला पहनने का समय:</strong> शाम को कथा सुनने और तारों को अर्घ्य देने के बाद माताएं इस पवित्र माला को गले में पहनती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">सहेजने की विधि: इस माला को अहोई अष्टमी से लेकर दिवाली या भाई दूज तक धारण किया जाता है. इसके बाद इसे उतारकर गंगाजल से शुद्ध करें, रोली-अक्षत अर्पित करें और सुरक्षित तिजोरी में रख दें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अहोई अष्टमी पूजा सामग्री लिस्ट:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पूजा को बिना किसी रुकावट के संपन्न करने के लिए सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चित्र व कलश:</strong> अहोई माता का चित्र (या गेरू/चावल का लेप), मिट्टी या तांबे का कलश और करवा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रोली और अक्षत:</strong> कुमकुम, हल्दी, बिना टूटे साबुत चावल और मौली (कलावा).</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दीपक और धूप:</strong> शुद्ध गाय के घी का दीपक, रुई की बत्ती और धूपबत्ती.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नैवेद्य (भोग):</strong> 8 पूड़ी, 8 मालपुए या हलवा और खोये के पेड़े.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अन्न व बायना:</strong> हाथ में रखने के लिए साबुत गेहूं के दाने, सास या बुजुर्ग महिला के लिए कपड़े और दक्षिणा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अर्घ्य लोटा:</strong> रात में तारों को जल अर्पित करने के लिए छोटा पात्र.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>श्री अहोई माता की आरती: </strong></p>
<p style="text-align: justify;">जय अहोई माता, जय अहोई माता।</p>
<p style="text-align: justify;">तुमको निसदिन ध्यावत, हरविष्णु विधाता॥</p>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।</p>
<p style="text-align: justify;">सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद गुण गाता॥</p>
<p style="text-align: justify;">माता रूप निरंजन, सुख-सम्पत्ति दाता।</p>
<p style="text-align: justify;">जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥</p>
<p style="text-align: justify;">तू ही पाताल बसन्ती, तू ही है सुखदाता।</p>
<p style="text-align: justify;">कर्म-प्रभाव प्रकाशक, जगनिटि से नाता॥</p>
<p style="text-align: justify;">जिस घर थारो वासा, वा घर सुख आता।</p>
<p style="text-align: justify;">तुम बिन कोई न दूजा, संकट में त्राता॥</p>
<p style="text-align: justify;">स्टवन तेरा जो गावे, दुःख-दरिद्र नसाता।</p>
<p style="text-align: justify;">पुत्र-पौत्र सुख पावे, मनवांछित फल पाता॥</p>
<p style="text-align: justify;">जय अहोई माता, जय अहोई माता।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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