07 Nov 2026, 07:43 PM
Fever Symptoms: बुखार में बढ़ जाता है शरीर का तापमान, फिर हमें क्यों लगती है ठंड; यहां समझिए
ABP News
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<p style="text-align: justify;">बुखार होने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है. ऐसे में आमतौर पर लगता है कि हमें गर्मी महसूस होनी चाहिए, लेकिन कई बार इसका उल्टा होता है. शरीर गर्म होने के बावजूद ठंड लगती है और दांत तक किटकिटाने लगते हैं. कई लोगों को इस दौरान कंबल ओढ़ने का मन भी करता है. दरअसल, इसके पीछे हमारे दिमाग का एक खास हिस्सा और शरीर की रोगों से लड़ने वाली क्षमता काम करती है. जब शरीर में वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण होता है तो दिमाग शरीर का तापमान बढ़ाने का संकेत देता है और इसी वजह से हमें ठंड लगती है. आइए समझते हैं कि बुखार में ऐसा क्यों होता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>दिमाग का यह हिस्सा तय करता है शरीर का तापमान</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हमारे दिमाग में हाइपोथैलेमस नाम का एक हिस्सा होता है. इसे शरीर का थर्मोस्टेट भी कह सकते हैं. जैसे घर में लगा थर्मोस्टेट तापमान को कंट्रोल करता है, वैसे ही हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान संभालता है. सामान्य तौर पर शरीर का तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति में थोड़ा अलग होता है. जब शरीर में कोई संक्रमण होता है तो इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने वाली क्षमता सक्रिय हो जाती है. इस दौरान शरीर कुछ खास रसायन छोड़ता है, जिन्हें पाइरोजेन कहा जाता है. ये रसायन दिमाग के हाइपोथैलेमस तक संदेश पहुंचाते हैं कि शरीर का तापमान बढ़ाना है. इसके बाद हाइपोथैलेमस तापमान का नया लक्ष्य तय कर देता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-do-we-get-hiccups-science-reason-diaphragm-contraction-vagus-nerve-how-to-stop-3210885">Science Behind Hiccups: क्या किसी के याद करने से आती है हिचकी, क्या है इसके पीछे का साइंस?&nbsp;</a></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>शरीर गर्म होने पर भी क्यों लगती है ठंड?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">अब सवाल आता है कि जब शरीर का तापमान पहले से बढ़ रहा होता है तो ठंड क्यों लगती है? दरअसल, जब हाइपोथैलेमस शरीर का नया तापमान तय करता है तो शरीर का मौजूदा तापमान उस नए लक्ष्य से कम होता है. ऐसे में दिमाग को लगता है कि शरीर अभी ठंडा है और उसे और गर्म करने की जरूरत है. इसी वजह से हमें ठंड महसूस होने लगती है. इस दौरान हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और कंपकंपी भी शुरू हो जाती है. शरीर की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और ढीली होती हैं. इससे गर्मी पैदा होती है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. यही वजह है कि बुखार चढ़ते समय कई लोगों को ठंड लगती है, जबकि उनका शरीर अंदर से गर्म हो रहा होता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>बुखार उतरते समय आने लगता है पसीना</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">जब संक्रमण से लड़ते हुए शरीर का तापमान कम करने का समय आता है तो हाइपोथैलेमस अपना तय तापमान फिर नीचे कर देता है. अब शरीर का तापमान नए लक्ष्य से ज्यादा होता है. ऐसे में शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है. इसके लिए पसीना निकलने लगता है और त्वचा की नसें फैल जाती हैं, जिससे शरीर की गर्मी बाहर निकलती है. इसी वजह से बुखार उतरते समय कई लोगों को बहुत पसीना आता है और पहले जैसी ठंड नहीं लगती. अगर बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेहोशी या लगातार तेज बुखार हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. बुखार के दौरान पानी और दूसरे तरल पदार्थ लेते रहें और तापमान पर नजर रखें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/infotainment/zydus-the-easiest-exam-breast-cancer-treatment-cost-recovery-modern-oncology-abp-news-experts-3211323#google_vignette">ब्रेस्ट कैंसर केयर: ABP News के कार्यक्रम में आधुनिक इलाज, खर्च और कैंसर के बाद की जिंदगी पर हुई चर्चा&nbsp;</a></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>दिमाग का यह हिस्सा तय करता है शरीर का तापमान</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हमारे दिमाग में हाइपोथैलेमस नाम का एक हिस्सा होता है. इसे शरीर का थर्मोस्टेट भी कह सकते हैं. जैसे घर में लगा थर्मोस्टेट तापमान को कंट्रोल करता है, वैसे ही हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान संभालता है. सामान्य तौर पर शरीर का तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति में थोड़ा अलग होता है. जब शरीर में कोई संक्रमण होता है तो इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने वाली क्षमता सक्रिय हो जाती है. इस दौरान शरीर कुछ खास रसायन छोड़ता है, जिन्हें पाइरोजेन कहा जाता है. ये रसायन दिमाग के हाइपोथैलेमस तक संदेश पहुंचाते हैं कि शरीर का तापमान बढ़ाना है. इसके बाद हाइपोथैलेमस तापमान का नया लक्ष्य तय कर देता है.</p>
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<h3 style="text-align: justify;"><strong>शरीर गर्म होने पर भी क्यों लगती है ठंड?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">अब सवाल आता है कि जब शरीर का तापमान पहले से बढ़ रहा होता है तो ठंड क्यों लगती है? दरअसल, जब हाइपोथैलेमस शरीर का नया तापमान तय करता है तो शरीर का मौजूदा तापमान उस नए लक्ष्य से कम होता है. ऐसे में दिमाग को लगता है कि शरीर अभी ठंडा है और उसे और गर्म करने की जरूरत है. इसी वजह से हमें ठंड महसूस होने लगती है. इस दौरान हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और कंपकंपी भी शुरू हो जाती है. शरीर की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और ढीली होती हैं. इससे गर्मी पैदा होती है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. यही वजह है कि बुखार चढ़ते समय कई लोगों को ठंड लगती है, जबकि उनका शरीर अंदर से गर्म हो रहा होता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>बुखार उतरते समय आने लगता है पसीना</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">जब संक्रमण से लड़ते हुए शरीर का तापमान कम करने का समय आता है तो हाइपोथैलेमस अपना तय तापमान फिर नीचे कर देता है. अब शरीर का तापमान नए लक्ष्य से ज्यादा होता है. ऐसे में शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है. इसके लिए पसीना निकलने लगता है और त्वचा की नसें फैल जाती हैं, जिससे शरीर की गर्मी बाहर निकलती है. इसी वजह से बुखार उतरते समय कई लोगों को बहुत पसीना आता है और पहले जैसी ठंड नहीं लगती. अगर बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेहोशी या लगातार तेज बुखार हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. बुखार के दौरान पानी और दूसरे तरल पदार्थ लेते रहें और तापमान पर नजर रखें.</p>
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Source Credit: abplive.com
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