19 Oct 2026, 02:27 PM
Kanya Pujan 2026: नवरात्रि कन्या पूजन से मिलेगी परेशानियों से मुक्ति, 19 और 20 अक्टूबर को महाष्टमी-महानवमी पर होगा विशेष अनुष्ठान
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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4"><strong>Navratri 2026:</strong> नवरात्रि के<span class="citation-725 citation-726 citation-727 citation-end-727">&nbsp;अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. व्रत रखने वाले भक्त कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं. कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति एवं सम्पन्नता आती है. कन्या भोज </span><span class="citation-725 citation-726 citation-end-726">के दौरान नौ कन्याओं का होना आवश्यक होता है. इस बीच यदि कन्याएं 10 वर्ष से कम आयु की </span><span class="citation-725 citation-end-725">हों</span> तो जातक को कभी धन की कमी नहीं होती और उसका जीवन उन्नतशील रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="5">श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका <strong>ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा</strong> ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 19 और 20 अक्टूबर को किया जाएगा, लेकिन अष्टमी पर होने वाला हवन 18 अक्टूबर को किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="6">पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का संयोग बन रहा है, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 मिनट तक रहेगी. 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि नहीं होने के कारण इस दिन अष्टमी का व्रत और पूजन नहीं किया जाएगा. वहीं 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहने के कारण इसी दिन महाअष्टमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे. अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा के साथ यह अनुष्ठान कर सकते हैं. इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजन करने, भोजन कराने, दक्षिणा देने और उपहार भेंट करने की परंपरा है. मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="8">महाअष्टमी और महानवमी 2026 की तिथियां व मुहूर्त</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="9">ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार तिथियों का समय इस प्रकार रहेगा:</p>
<table data-path-to-node="10">
<thead>
<tr>
<td><strong>पर्व / तिथि</strong></td>
<td><strong>प्रारंभ समय</strong></td>
<td><strong>समापन समय</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,1,0,0"><strong data-path-to-node="10,1,0,0" data-index-in-node="0">महाअष्टमी</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,1,0">18 अक्टूबर, सुबह 08:27 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,2,0">19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,2,0,0"><strong data-path-to-node="10,2,0,0" data-index-in-node="0">महानवमी</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,1,0">19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,2,0">20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे</span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11">नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 मिनट तक रहेगी. गणना के मुताबिक 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि होने के कारण महानवमी का पूजन किया जाएगा. जो श्रद्धालु नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 मिनट से पहले यह अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="13">कन्या पूजन एवं देवी के शस्त्रों की पूजा</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="14">आमतौर पर नवमी को कन्याओं का पूजन कर भोजन कराया जाता है, लेकिन कई श्रद्धालु अष्टमी को भी कन्या पूजन करते हैं. शास्त्रों के अनुसार 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन कराने से सभी दोष समाप्त होते हैं. भोजन कराने से पहले देवी को नैवेद्य लगाएं और भेंट की जाने वाली वस्तुएं भी पहले देवी को अर्पित करें. यदि कन्या भोजन कराना संभव न हो, तो कच्चा राशन जैसे चावल, आटा, सब्जी और फल कन्या के घर जाकर भेंट किए जा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="15">अष्टमी तिथि पर मां शक्ति के साथ-साथ देवी के शस्त्रों की भी पूजा करनी चाहिए. विशेष आहुतियों के साथ हवन करवाएं, 9 कन्याओं को भोजन कराएं, मां दुर्गा को विशेष प्रसाद अर्पित करें और रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन व नृत्यादि उत्सव मनाएं.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="17">आयु अनुसार कन्या पूजन का महत्व</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="18">शास्त्रों में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं के अलग-अलग स्वरूप बताए गए हैं:</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,0,0"><strong data-path-to-node="19,0,0" data-index-in-node="0">2 वर्ष (कौमारी):</strong> दुख और दरिद्रता का नाश होता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,1,0"><strong data-path-to-node="19,1,0" data-index-in-node="0">3 वर्ष (त्रिमूर्ति):</strong> धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,2,0"><strong data-path-to-node="19,2,0" data-index-in-node="0">4 वर्ष (कल्याणी):</strong> सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,3,0"><strong data-path-to-node="19,3,0" data-index-in-node="0">5 वर्ष (रोहिणी):</strong> रोगों से मुक्ति मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,4,0"><strong data-path-to-node="19,4,0" data-index-in-node="0">6 वर्ष (कालिका):</strong> विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,5,0"><strong data-path-to-node="19,5,0" data-index-in-node="0">7 वर्ष (चंडिका):</strong> ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,6,0"><strong data-path-to-node="19,6,0" data-index-in-node="0">8 वर्ष (शांभवी):</strong> सामाजिक लोकप्रियता मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,7,0"><strong data-path-to-node="19,7,0" data-index-in-node="0">9 वर्ष (दुर्गा):</strong> शत्रु विजय और असाध्य कार्यों की सिद्धि होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,8,0"><strong data-path-to-node="19,8,0" data-index-in-node="0">10 वर्ष (सुभद्रा):</strong> सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="21">समस्याओं के निवारण हेतु विशेष उपाय</h3>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="22,0,0"><strong data-path-to-node="22,0,0" data-index-in-node="0">विवाह में देरी:</strong> 5 साल की कन्या को भोजन कराकर श्रृंगार सामग्री भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,1,0"><strong data-path-to-node="22,1,0" data-index-in-node="0">धन संबंधी समस्या:</strong> 4 साल की कन्या को खीर खिलाएं और पीले वस्त्र व दक्षिणा दें.</li>
<li data-path-to-node="22,2,0"><strong data-path-to-node="22,2,0" data-index-in-node="0">शत्रु बाधा व काम में रुकावट:</strong> 9 साल की तीन कन्याओं को भोजन सामग्री व वस्त्र दें.</li>
<li data-path-to-node="22,3,0"><strong data-path-to-node="22,3,0" data-index-in-node="0">पारिवारिक क्लेश:</strong> 3 और 10 साल की कन्याओं को मिठाई भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,4,0"><strong data-path-to-node="22,4,0" data-index-in-node="0">बेरोजगारी:</strong> 6 साल की कन्या को छाता और वस्त्र भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,5,0"><strong data-path-to-node="22,5,0" data-index-in-node="0">समस्त समस्याओं का निवारण:</strong> 5 से 10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री, दूध, पानी या फलों का रस तथा सौंदर्य सामग्री भेंट करें.</li>
</ul>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="24">पौराणिक संदर्भ एवं अष्टमी-नवमी का महत्व</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="25">पौराणिक ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि के अंतिम दिन कौमारी पूजन अनिवार्य माना गया है, इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं होता. कन्या पूजन के लिए सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि उपयुक्त मानी जाती है. जो श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास नहीं रख पाते, वे केवल अष्टमी और नवमी का व्रत रखकर मां दुर्गा की पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते हैं. नवमी नवरात्रि का समापन दिवस है, जिस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="27">कन्या पूजन की प्रामाणिक विधि</h3>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="28,0,0"><strong data-path-to-node="28,0,0" data-index-in-node="0">स्वागत व पाद्य प्रक्षालन:</strong> घर पधारीं कन्याओं का सत्कार करें और स्वच्छ जल से उनके पैर धोएं.</li>
<li data-path-to-node="28,1,0"><strong data-path-to-node="28,1,0" data-index-in-node="0">चरण स्पर्श:</strong> सभी नौ कन्याओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.</li>
<li data-path-to-node="28,2,0"><strong data-path-to-node="28,2,0" data-index-in-node="0">आसन व तिलक:</strong> कन्याओं को स्वच्छ आसन पर बैठाएं,<span class="animating"> माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं और कलावा बांधें.</span></li>
<li data-path-to-node="28,3,0"><strong data-path-to-node="28,3,0" data-index-in-node="0">भोग समर्पण:</strong> भोजन का पहला हिस्सा मां दुर्गा को अर्पित करने के बाद कन्याओं को हलवा, पूरी और चना (या सामर्थ्यानुसार भोजन) परोसें.</li>
<li data-path-to-node="28,4,0"><strong data-path-to-node="28,4,0" data-index-in-node="0">दक्षिणा व विदाई:</strong> भोजनोपरांत सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा व उपहार अवश्य दें. प्रस्थान के समय पुनः चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और पूजन में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें.</li>
</ul>
<h4 class="abp-article-title" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/dussehra-2026-date-shubh-muhurat-ravan-dahan-shastra-puja-vidhi-significance-3203726">विजयादशमी 2026 कब है? 20 या 21 अक्टूबर को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, नोट करें प्रदोष काल का समय</a></strong></h4>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="5">श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका <strong>ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा</strong> ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 19 और 20 अक्टूबर को किया जाएगा, लेकिन अष्टमी पर होने वाला हवन 18 अक्टूबर को किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="6">पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का संयोग बन रहा है, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 मिनट तक रहेगी. 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि नहीं होने के कारण इस दिन अष्टमी का व्रत और पूजन नहीं किया जाएगा. वहीं 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहने के कारण इसी दिन महाअष्टमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे. अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा के साथ यह अनुष्ठान कर सकते हैं. इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजन करने, भोजन कराने, दक्षिणा देने और उपहार भेंट करने की परंपरा है. मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="8">महाअष्टमी और महानवमी 2026 की तिथियां व मुहूर्त</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="9">ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार तिथियों का समय इस प्रकार रहेगा:</p>
<table data-path-to-node="10">
<thead>
<tr>
<td><strong>पर्व / तिथि</strong></td>
<td><strong>प्रारंभ समय</strong></td>
<td><strong>समापन समय</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,1,0,0"><strong data-path-to-node="10,1,0,0" data-index-in-node="0">महाअष्टमी</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,1,0">18 अक्टूबर, सुबह 08:27 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,2,0">19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,2,0,0"><strong data-path-to-node="10,2,0,0" data-index-in-node="0">महानवमी</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,1,0">19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,2,0">20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे</span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11">नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 मिनट तक रहेगी. गणना के मुताबिक 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि होने के कारण महानवमी का पूजन किया जाएगा. जो श्रद्धालु नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 मिनट से पहले यह अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="13">कन्या पूजन एवं देवी के शस्त्रों की पूजा</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="14">आमतौर पर नवमी को कन्याओं का पूजन कर भोजन कराया जाता है, लेकिन कई श्रद्धालु अष्टमी को भी कन्या पूजन करते हैं. शास्त्रों के अनुसार 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन कराने से सभी दोष समाप्त होते हैं. भोजन कराने से पहले देवी को नैवेद्य लगाएं और भेंट की जाने वाली वस्तुएं भी पहले देवी को अर्पित करें. यदि कन्या भोजन कराना संभव न हो, तो कच्चा राशन जैसे चावल, आटा, सब्जी और फल कन्या के घर जाकर भेंट किए जा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="15">अष्टमी तिथि पर मां शक्ति के साथ-साथ देवी के शस्त्रों की भी पूजा करनी चाहिए. विशेष आहुतियों के साथ हवन करवाएं, 9 कन्याओं को भोजन कराएं, मां दुर्गा को विशेष प्रसाद अर्पित करें और रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन व नृत्यादि उत्सव मनाएं.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="17">आयु अनुसार कन्या पूजन का महत्व</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="18">शास्त्रों में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं के अलग-अलग स्वरूप बताए गए हैं:</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,0,0"><strong data-path-to-node="19,0,0" data-index-in-node="0">2 वर्ष (कौमारी):</strong> दुख और दरिद्रता का नाश होता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,1,0"><strong data-path-to-node="19,1,0" data-index-in-node="0">3 वर्ष (त्रिमूर्ति):</strong> धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,2,0"><strong data-path-to-node="19,2,0" data-index-in-node="0">4 वर्ष (कल्याणी):</strong> सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,3,0"><strong data-path-to-node="19,3,0" data-index-in-node="0">5 वर्ष (रोहिणी):</strong> रोगों से मुक्ति मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,4,0"><strong data-path-to-node="19,4,0" data-index-in-node="0">6 वर्ष (कालिका):</strong> विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,5,0"><strong data-path-to-node="19,5,0" data-index-in-node="0">7 वर्ष (चंडिका):</strong> ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,6,0"><strong data-path-to-node="19,6,0" data-index-in-node="0">8 वर्ष (शांभवी):</strong> सामाजिक लोकप्रियता मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,7,0"><strong data-path-to-node="19,7,0" data-index-in-node="0">9 वर्ष (दुर्गा):</strong> शत्रु विजय और असाध्य कार्यों की सिद्धि होती है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="19,8,0"><strong data-path-to-node="19,8,0" data-index-in-node="0">10 वर्ष (सुभद्रा):</strong> सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="21">समस्याओं के निवारण हेतु विशेष उपाय</h3>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="22,0,0"><strong data-path-to-node="22,0,0" data-index-in-node="0">विवाह में देरी:</strong> 5 साल की कन्या को भोजन कराकर श्रृंगार सामग्री भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,1,0"><strong data-path-to-node="22,1,0" data-index-in-node="0">धन संबंधी समस्या:</strong> 4 साल की कन्या को खीर खिलाएं और पीले वस्त्र व दक्षिणा दें.</li>
<li data-path-to-node="22,2,0"><strong data-path-to-node="22,2,0" data-index-in-node="0">शत्रु बाधा व काम में रुकावट:</strong> 9 साल की तीन कन्याओं को भोजन सामग्री व वस्त्र दें.</li>
<li data-path-to-node="22,3,0"><strong data-path-to-node="22,3,0" data-index-in-node="0">पारिवारिक क्लेश:</strong> 3 और 10 साल की कन्याओं को मिठाई भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,4,0"><strong data-path-to-node="22,4,0" data-index-in-node="0">बेरोजगारी:</strong> 6 साल की कन्या को छाता और वस्त्र भेंट करें.</li>
<li data-path-to-node="22,5,0"><strong data-path-to-node="22,5,0" data-index-in-node="0">समस्त समस्याओं का निवारण:</strong> 5 से 10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री, दूध, पानी या फलों का रस तथा सौंदर्य सामग्री भेंट करें.</li>
</ul>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="24">पौराणिक संदर्भ एवं अष्टमी-नवमी का महत्व</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="25">पौराणिक ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि के अंतिम दिन कौमारी पूजन अनिवार्य माना गया है, इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं होता. कन्या पूजन के लिए सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि उपयुक्त मानी जाती है. जो श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास नहीं रख पाते, वे केवल अष्टमी और नवमी का व्रत रखकर मां दुर्गा की पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते हैं. नवमी नवरात्रि का समापन दिवस है, जिस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था.</p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="27">कन्या पूजन की प्रामाणिक विधि</h3>
<ul style="text-align: justify;">
<li data-path-to-node="28,0,0"><strong data-path-to-node="28,0,0" data-index-in-node="0">स्वागत व पाद्य प्रक्षालन:</strong> घर पधारीं कन्याओं का सत्कार करें और स्वच्छ जल से उनके पैर धोएं.</li>
<li data-path-to-node="28,1,0"><strong data-path-to-node="28,1,0" data-index-in-node="0">चरण स्पर्श:</strong> सभी नौ कन्याओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.</li>
<li data-path-to-node="28,2,0"><strong data-path-to-node="28,2,0" data-index-in-node="0">आसन व तिलक:</strong> कन्याओं को स्वच्छ आसन पर बैठाएं,<span class="animating"> माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं और कलावा बांधें.</span></li>
<li data-path-to-node="28,3,0"><strong data-path-to-node="28,3,0" data-index-in-node="0">भोग समर्पण:</strong> भोजन का पहला हिस्सा मां दुर्गा को अर्पित करने के बाद कन्याओं को हलवा, पूरी और चना (या सामर्थ्यानुसार भोजन) परोसें.</li>
<li data-path-to-node="28,4,0"><strong data-path-to-node="28,4,0" data-index-in-node="0">दक्षिणा व विदाई:</strong> भोजनोपरांत सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा व उपहार अवश्य दें. प्रस्थान के समय पुनः चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और पूजन में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें.</li>
</ul>
<h4 class="abp-article-title" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/dussehra-2026-date-shubh-muhurat-ravan-dahan-shastra-puja-vidhi-significance-3203726">विजयादशमी 2026 कब है? 20 या 21 अक्टूबर को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, नोट करें प्रदोष काल का समय</a></strong></h4>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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