1977 में रिलायंस ले आया IPO... कैसे धीरूभाई अंबानी ने बदली थी आम जनता की किस्मत
14 Oct 2026, 07:08 PM

1977 में रिलायंस ले आया IPO... कैसे धीरूभाई अंबानी ने बदली थी आम जनता की किस्मत

ABP News
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<p style="text-align: justify;">रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो आईपीओ को लेकर इस वक्त शेयर बाजार में हलचल तेज है. इसे लेकर निवेशकों का उत्साह चरम पर है. लेकिन क्या आपको पता है कि रिलायंस (Reliance Industries) का पहला आईपीओ 1977  में आया था.</p>
<p style="text-align: justify;">यह वह दौर था, जब देश की आम जनता के लिए निवेश का मतलब सोना-<a title="चांदी" href="https://www.abplive.com/silver-prices" data-type="interlinkingkeywords">चांदी</a> से बढ़कर कुछ और नहीं था. उसी जमाने में फाउंडर धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) ने उनके विजन को बदलते हुए उनके लिए शेयर बाजार का दरवाजा खोला, उनकी निवेश की रणनीति बदली, कंपनी की तरक्की में हिस्सा लेने का मौका मिला और अमीरों के खेल में अब आम जनता भी शामिल होने लगे. </p>
<h3 style="text-align: justify;">इस तरह से रिलायंस ने जीता भरोसा</h3>
<p style="text-align: justify;">यह कहानी ABP न्यूज के प्राइम-टाइम टीवी प्रोग्राम 'जनहित' में दिखाई गई, जिसे एंकर चित्रा त्रिपाठी होस्ट करती हैं.  यह शो कल शाम में प्रसारित हुआ था. इस एपिसोड में बताया गया कि कैसे उस दौर में रिलायंस ने फंड जुटाने के लिए सरकारी बैंकों से लोन लेने की जगह सीधे आम जनता को अपना बिजनेस पार्टनर बनाया. इस तरह से रिलायंस के 1977 के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) ने आम लोगों के लिए कंपनी में निवेश का रास्ता खोला.</p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक कन्वर्टिबल डिबेंचर (Convertible Debentures) रहा. रिलायंस ने फंड जुटाने के लिए ऐसे डिबेंचर जारी किए, जो बाद में रिलायंस के शेयरों बदल दिए गए. इससे एक तो निवेशकों को तय समय तक फिक्स्ड ब्याज मिलता रहा. बाद में शेयरों का भाव बढ़ा, तो उससे भी उन्हें मुनाफा हुआ. नतीजतन, कंपनी पर लोगों का भरोसा बढ़ता गया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पुरानी सोच को दी चुनौती</h3>
<p style="text-align: justify;">गुजरात के एक छोटे से गांव में स्कूल टीचर के परिवार में जन्मे धीरूभाई अंबानी ने न केवल आगे चलकर एक बड़े औद्योगिक घराने की नींव रखी, बल्कि उन्होंने उस पारंपरिक सोच को भी चुनौती दी, जिसके बारे में कहा जाता था कि कोई बड़ी इंडस्ट्री या बड़ा उद्योग केवल वही लगा या चला सकता है, जिसके पास पुरखों की विरासत हो या बड़ी पारिवारिक संपत्ति हो.</p>
<p style="text-align: justify;">धीरूभाई की सबसे बड़ी सोच यही थी कि उन्होंने कंपनी की तरक्की में आम आदमी की आर्थिक उन्नति से जोड़ा. इस तरह से जैसे-जैसे कंपनी आगे बढ़ती गई, इसके सफर का हिस्सा बने लोग भी आगे बढ़ते चले गए. रिलायंस की पहचान का एक अहम हिस्सा बन गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सिर्फ 10 रुपये में शेयर</h3>
<p style="text-align: justify;">धीरूभाई अंबानी जब 1977 में रिलायंस का आईपीओ लेकर आए, तब उन्होंने इसके लिए शेयर की कीमत सिर्फ 10 रुपये प्रति शेयर रखी थी ताकि इसे हर कोई आसानी से खरीद सके. वह एक ऐसा दौर था, जब  शेयर बाजार और बड़ी कंपनियों में निवेश केवल अमीर घरानों के लोग ही करते थे, लेकिन धीरूभाई ने इसे आम लोगों के घरों तक पहुंचाया.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="Reliance ₹1,600 से ₹1,150! ₹4 लाख करोड़ डूबे, अब Jio IPO पलटेगा पूरा Game? #jio #ambani | Paisa Live" src="https://www.youtube.com/embed/alrPeGi40ng" width="853" height="480" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
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Source Credit: abplive.com
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