22 Oct 2026, 04:12 PM
Ekadashi Paran 2026: आज 2:47 बजे एकादशी खत्म, फिर भी व्रत कल क्यों खोलेंगे?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Papankusha Ekadashi 2026:</strong> आज 22 अक्टूबर, गुरुवार को पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो जाएगी और इसके तुरंत बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के मन में एक सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एकादशी आज दोपहर ही खत्म हो रही है, तो व्रत खोलने के लिए शुक्रवार सुबह तक इंतजार क्यों करना होगा? क्या आज दोपहर 2:47 बजे के बाद भोजन करने से व्रत अधूरा रह जाएगा?</p>
<p style="text-align: justify;">इस सवाल का जवाब एकादशी व्रत के पारण से जुड़े धार्मिक नियमों में मिलता है. दरअसल, एकादशी तिथि समाप्त होना और व्रत का पारण करना दो अलग-अलग बातें हैं. यही अंतर समझना जरूरी है, ताकि व्रत सही विधि से पूरा किया जा सके.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>आज 2:47 बजे एकादशी खत्म, फिर पारण कल क्यों?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. परंपरागत नियमों के अनुसार एकादशी का उपवास अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर खोला जाता है. इसे पारण कहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे एकादशी समाप्त होने के बाद द्वादशी शुरू जरूर हो जाएगी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसी समय व्रत खोल दिया जाए.</p>
<p style="text-align: justify;">एकादशी व्रत के सामान्य नियम के अनुसार पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में किया जाता है. इसलिए आज व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का दिन 23 अक्टूबर निर्धारित है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">द्वादशी लगने के बाद भी क्यों नहीं कर सकते पारण?</h3>
<p style="text-align: justify;">यहां एक और महत्वपूर्ण धार्मिक नियम समझना जरूरी है. द्वादशी तिथि का शुरुआती चौथाई भाग हरिवासर कहलाता है. वैष्णव परंपरा में हरिवासर के दौरान एकादशी व्रत का पारण नहीं किया जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे द्वादशी शुरू होगी. इसके बाद हरिवासर की अवधि रहेगी. हालांकि, हरिवासर समाप्त हो जाने का अर्थ भी यह नहीं कि उसी रात व्रत खोल लिया जाए. सामान्य एकादशी व्रत में अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित पारण काल का पालन किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यही वजह है कि आज दोपहर एकादशी समाप्त होने के बावजूद पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">23 अक्टूबर को कितने बजे खोलें एकादशी का व्रत?</h3>
<p style="text-align: justify;">नई दिल्ली NCR के पंचांग के अनुसार पापांकुशा एकादशी का समय इस प्रकार है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एकादशी तिथि प्रारंभ:</strong> 21 अक्टूबर, दोपहर 2:11 बजे<br /><strong>एकादशी तिथि समाप्त:</strong> 22 अक्टूबर, दोपहर 2:47 बजे<br /><strong>द्वादशी तिथि समाप्त:</strong> 23 अक्टूबर, दोपहर लगभग 2:35 बजे<br /><strong>व्रत पारण:</strong> शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026<br /><strong>पारण का समय:</strong> सुबह 6:27 बजे से 8:42 बजे तक (सामान्य स्मार्त परंपरा)</p>
<p style="text-align: justify;">अलग-अलग वैष्णव परंपराओं में पारण की अंतिम समय-सीमा अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, इस्कॉन कैलेंडर में 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 10:12 बजे तक पारण का समय दिया गया है. इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">क्या गलती से आज व्रत खोलने पर व्रत टूट जाएगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">यदि कोई श्रद्धालु आज दोपहर एकादशी समाप्त होते ही भोजन कर लेता है, तो वह निर्धारित पारण विधि का पालन नहीं कर पाएगा. धार्मिक परंपरा में इसे विधिवत पारण नहीं माना जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, इसे लेकर डरने या किसी अनिष्ट की आशंका पालने की जरूरत नहीं है. व्रत का उद्देश्य केवल भूखे रहना नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और भगवान विष्णु की उपासना भी है. बीमारी, दवाओं या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से लंबे समय तक उपवास करना संभव न हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पारण के समय क्या करना चाहिए?</h3>
<p style="text-align: justify;">शुक्रवार सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें. उन्हें तुलसी दल और सात्विक भोग अर्पित करें. इसके बाद निर्धारित पारण काल में जल और अपनी परंपरा के अनुसार उपयुक्त भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें.</p>
<p style="text-align: justify;">22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे एकादशी तिथि समाप्त होगी, व्रत नहीं. पापांकुशा एकादशी का विधिवत पारण 23 अक्टूबर को ही किया जाएगा. यही तिथि समाप्त होने और व्रत पूरा होने के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के मन में एक सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एकादशी आज दोपहर ही खत्म हो रही है, तो व्रत खोलने के लिए शुक्रवार सुबह तक इंतजार क्यों करना होगा? क्या आज दोपहर 2:47 बजे के बाद भोजन करने से व्रत अधूरा रह जाएगा?</p>
<p style="text-align: justify;">इस सवाल का जवाब एकादशी व्रत के पारण से जुड़े धार्मिक नियमों में मिलता है. दरअसल, एकादशी तिथि समाप्त होना और व्रत का पारण करना दो अलग-अलग बातें हैं. यही अंतर समझना जरूरी है, ताकि व्रत सही विधि से पूरा किया जा सके.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>आज 2:47 बजे एकादशी खत्म, फिर पारण कल क्यों?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. परंपरागत नियमों के अनुसार एकादशी का उपवास अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर खोला जाता है. इसे पारण कहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे एकादशी समाप्त होने के बाद द्वादशी शुरू जरूर हो जाएगी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसी समय व्रत खोल दिया जाए.</p>
<p style="text-align: justify;">एकादशी व्रत के सामान्य नियम के अनुसार पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में किया जाता है. इसलिए आज व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का दिन 23 अक्टूबर निर्धारित है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">द्वादशी लगने के बाद भी क्यों नहीं कर सकते पारण?</h3>
<p style="text-align: justify;">यहां एक और महत्वपूर्ण धार्मिक नियम समझना जरूरी है. द्वादशी तिथि का शुरुआती चौथाई भाग हरिवासर कहलाता है. वैष्णव परंपरा में हरिवासर के दौरान एकादशी व्रत का पारण नहीं किया जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे द्वादशी शुरू होगी. इसके बाद हरिवासर की अवधि रहेगी. हालांकि, हरिवासर समाप्त हो जाने का अर्थ भी यह नहीं कि उसी रात व्रत खोल लिया जाए. सामान्य एकादशी व्रत में अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित पारण काल का पालन किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यही वजह है कि आज दोपहर एकादशी समाप्त होने के बावजूद पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">23 अक्टूबर को कितने बजे खोलें एकादशी का व्रत?</h3>
<p style="text-align: justify;">नई दिल्ली NCR के पंचांग के अनुसार पापांकुशा एकादशी का समय इस प्रकार है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एकादशी तिथि प्रारंभ:</strong> 21 अक्टूबर, दोपहर 2:11 बजे<br /><strong>एकादशी तिथि समाप्त:</strong> 22 अक्टूबर, दोपहर 2:47 बजे<br /><strong>द्वादशी तिथि समाप्त:</strong> 23 अक्टूबर, दोपहर लगभग 2:35 बजे<br /><strong>व्रत पारण:</strong> शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026<br /><strong>पारण का समय:</strong> सुबह 6:27 बजे से 8:42 बजे तक (सामान्य स्मार्त परंपरा)</p>
<p style="text-align: justify;">अलग-अलग वैष्णव परंपराओं में पारण की अंतिम समय-सीमा अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, इस्कॉन कैलेंडर में 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 10:12 बजे तक पारण का समय दिया गया है. इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">क्या गलती से आज व्रत खोलने पर व्रत टूट जाएगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">यदि कोई श्रद्धालु आज दोपहर एकादशी समाप्त होते ही भोजन कर लेता है, तो वह निर्धारित पारण विधि का पालन नहीं कर पाएगा. धार्मिक परंपरा में इसे विधिवत पारण नहीं माना जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, इसे लेकर डरने या किसी अनिष्ट की आशंका पालने की जरूरत नहीं है. व्रत का उद्देश्य केवल भूखे रहना नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और भगवान विष्णु की उपासना भी है. बीमारी, दवाओं या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से लंबे समय तक उपवास करना संभव न हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पारण के समय क्या करना चाहिए?</h3>
<p style="text-align: justify;">शुक्रवार सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें. उन्हें तुलसी दल और सात्विक भोग अर्पित करें. इसके बाद निर्धारित पारण काल में जल और अपनी परंपरा के अनुसार उपयुक्त भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें.</p>
<p style="text-align: justify;">22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे एकादशी तिथि समाप्त होगी, व्रत नहीं. पापांकुशा एकादशी का विधिवत पारण 23 अक्टूबर को ही किया जाएगा. यही तिथि समाप्त होने और व्रत पूरा होने के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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