निगहबान- मरने के बाद भी जाति नहीं छोड़ती पीछा
03 Oct 2026, 05:46 PM

निगहबान- मरने के बाद भी जाति नहीं छोड़ती पीछा

Patrika
@patrika
संदीप पुरोहितकल एक श्मशान घाट गया था। एक साथी की माताजी को अंतिम विदाई देने। श्मशान के मुख्य द्वार पर बड़े अक्षरों में एक जाति विशेष का नाम लिखा था। बस, यहीं से मन में एक सवाल कौंधा। क्या मरने के बाद भी जाति हमारा पीछा नहीं छोड़ती? जीवन भर तो हम जाति के नाम पर बंटे रहते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी अलग-अलग श्मशान! केवल अलग-अलग जातियों के ही नहीं, बल्कि कई जगह एक ही जाति की उपजातियों के भी अलग श्मशान हैं। ब्राह्मण, राजपूत, जाट, वैश्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग-लगभग हर समुदाय का अपना अलग श्मशान।
Source Credit: patrika.com
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