Early Signs Of Cancer: भारत में सबसे कॉमन कैंसर कौन-सा, किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
07 Nov 2026, 07:43 PM

Early Signs Of Cancer: भारत में सबसे कॉमन कैंसर कौन-सा, किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Early Symptoms Of Breast Cancer In Women India:</strong> कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है. भारत में भी कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि देश में कौन से कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं और शरीर में दिखने वाले किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">fortishealthcare की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नए मामलों की संख्या के हिसाब से ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर है. यह महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर भी है. इसके अलावा लंग कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, स्टमक कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर भी भारत में प्रमुख कैंसर में शामिल हैं. 7 नवंबर को नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे मनाया जाता है. इस दिन कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने और बीमारी की समय पर पहचान की अहमियत समझाने पर जोर दिया जाता है. कैंसर के जोखिम कारकों और शुरुआती संकेतों की जानकारी होने से समय पर डॉक्टर से सलाह लेने में मदद मिल सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong> ब्रेस्ट कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत में नए मामलों के हिसाब से ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर है. महिलाओं में यह सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है. इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव, हार्मोनल बदलाव और बढ़ती उम्र जैसे कई कारक हो सकते हैं. ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम कारकों में परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास, मोटापा, शराब का सेवन, देर से मेनोपॉज और बच्चे न होना या अधिक उम्र में बच्चे होना शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/11/06/d19b0c7bee1a7287664819c93859048717939533494151257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;">शुरुआती पहचान के लिए ब्रेस्ट में गांठ, आकार में बदलाव या निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज जैसे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है. डॉक्टर द्वारा की जाने वाली जांच और मैमोग्राम शुरुआती पहचान में मदद कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong> लंग कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लंग कैंसर भी भारत में एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता है, खासकर पुरुषों में. इसका सबसे बड़ा जोखिम तंबाकू का सेवन माना जाता है. सिगरेट और बीड़ी पीने के अलावा दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में आना, वायु प्रदूषण, एस्बेस्टस और रेडॉन गैस जैसे कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. लंबे समय तक रहने वाली खांसी, खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द और बिना वजह वजन कम होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ओरल कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत में ओरल कैंसर भी बड़ी संख्या में सामने आता है. इसमें होंठ, जीभ, मसूड़े और मुंह के दूसरे हिस्सों का कैंसर शामिल है. तंबाकू और सुपारी के इस्तेमाल से जुड़ी आदतें इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं. खैनी, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पादों का सेवन, धूम्रपान, ज्यादा शराब का सेवन और एचपीवी संक्रमण जोखिम बढ़ा सकते हैं. मुंह में सफेद या लाल धब्बे, ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो या कोई असामान्य उभार दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/11/06/82462d1df7cc9dc26ad53ba964d0e25e17939533696271257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सर्वाइकल कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सर्वाइकल कैंसर भी भारतीय महिलाओं में एक महत्वपूर्ण कैंसर है. इसके ज्यादातर मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी के लगातार बने रहने वाले संक्रमण से जुड़े होते हैं. एचपीवी संक्रमण के अलावा कमजोर इम्यून सिस्टम, धूम्रपान और लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स का इस्तेमाल जैसे कारक भी जोखिम से जुड़े हैं. इस कैंसर की समय पर पहचान के लिए पैप स्मीयर जांच महत्वपूर्ण है. एचपीवी वैक्सीन भी उन संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong> स्टमक कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्टमक कैंसर, जिसे गैस्ट्रिक कैंसर भी कहा जाता है, भारत में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है. शुरुआती दौर में इसके लक्षण काफी सामान्य लग सकते हैं, इसलिए कई बार इसकी पहचान देर से होती है. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण इसका एक प्रमुख जोखिम कारक है. इसके अलावा ज्यादा नमक वाले, स्मोक्ड या अचार वाले खाद्य पदार्थों का सेवन, धूम्रपान, शराब और परिवार में स्टमक कैंसर का इतिहास भी जोखिम से जुड़े हैं. लगातार अपच, सीने में जलन, पेट दर्द, मतली और थोड़ा खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"> <strong>कोलोरेक्टल कैंसर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय को प्रभावित करता है. भारत में इसके मामले भी बढ़ रहे हैं. यह कई बार पॉलीप नाम की छोटी गैर-कैंसरकारी वृद्धि से शुरू हो सकता है. 50 साल से अधिक उम्र, फाइबर की कम मात्रा वाला आहार, प्रोसेस्ड मीट का ज्यादा सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, धूम्रपान और शराब का सेवन इसके जोखिम कारकों में शामिल हैं. पेट की ऐंठन, मल त्याग की आदतों में बदलाव या मल में खून आना ऐसे संकेत हैं जिन पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैंसर के इन सामान्य संकेतों को न करें नजरअंदाज</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कैंसर के अलग-अलग प्रकार में लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. बिना वजह वजन कम होना, लगातार थकान, शरीर में गांठ या किसी हिस्से का मोटा होना, ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो और लंबे समय तक खांसी या आवाज में बदलाव ऐसे संकेत हो सकते हैं जिनकी जांच करानी चाहिए. हर लक्षण का मतलब कैंसर होना नहीं है. लेकिन अगर कोई बदलाव लगातार बना हुआ है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैंसर से बचाव में लाइफस्टाइल की भी भूमिका</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हर कैंसर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई मामलों में जोखिम कम करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव मददगार हो सकते हैं. तंबाकू और शराब से बचना, फलों और सब्जियों से भरपूर संतुलित डाइट लेना, वजन को स्वस्थ बनाए रखना और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना इसके लिए महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं. कैंसर की समय पर पहचान भी बेहद महत्वपूर्ण है. शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज ज्यादा प्रभावी होने की संभावना रहती है. इसलिए शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे पर समझें संकेतों की अहमियत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे हर साल 7 नवंबर को मनाया जाता है. इस दिन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को बीमारी की शुरुआती पहचान के महत्व के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया जाता है. इस मौके पर यह समझना जरूरी है कि कैंसर सिर्फ एक तरह की बीमारी नहीं है. ब्रेस्ट कैंसर से लेकर लंग कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, स्टमक कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर तक इसके अलग-अलग प्रकार हैं और इनके लक्षण भी अलग हो सकते हैं.</p>
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Source Credit: abplive.com
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