घर पर नहीं मिल रहे पुरोहित? मातृ नवमी पर 10 मिनट में खुद ऐसे करें माताओं का तर्पण, मिलेगा पूरा फल
04 Oct 2026, 02:27 PM

घर पर नहीं मिल रहे पुरोहित? मातृ नवमी पर 10 मिनट में खुद ऐसे करें माताओं का तर्पण, मिलेगा पूरा फल

ABP News
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<p data-path-to-node="1"><strong>Matru Navami 2026:</strong> पितृपक्ष की नवमी तिथि को 'मातृ नवमी' कहा जाता है. यह दिन परिवार की दिवंगत माताओं, दादियों, नानियों और सुहागिन महिलाओं के श्राद्ध व तर्पण के लिए समर्पित होता है. कई बार व्यस्तता या किसी कारणवश घर पर पुरोहित (पंडित जी) उपलब्ध नहीं हो पाते. ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है. शास्त्रों के अनुसार, यदि सच्ची श्रद्धा और सही भावना हो, तो आप स्वयं भी मात्र 10 मिनट में यह विधि पूरी कर सकते हैं.</p>
<p data-path-to-node="2">आइए जानते हैं मातृ नवमी पर घर पर ही तर्पण और पिंडदान करने की सबसे आसान और प्रामाणिक विधि.</p>
<p data-path-to-node="2"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=pncHPuHHktEKa3zF" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<h3 data-path-to-node="4">तर्पण के लिए जरूरी सामग्री</h3>
<p data-path-to-node="5">विधि शुरू करने से पहले ये चीजें अपने पास रख लें:</p>
<ul>
<li data-path-to-node="6,0,0">तांबे या पीतल का लोटा (लोहे या स्टील का बर्तन न लें)</li>
<li data-path-to-node="6,1,0">साफ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और गंगाजल</li>
<li data-path-to-node="6,2,0">काले तिल और जौ</li>
<li data-path-to-node="6,3,0">कुशा (दूब घास) की अंगूठी</li>
<li data-path-to-node="6,4,0">सफेद या पीले फूल</li>
<li data-path-to-node="6,5,0">रोली या चंदन</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="8">10 मिनट में ऐसे करें सरल तर्पण विधि</h3>
<p data-path-to-node="9,0,0"><strong data-path-to-node="9,0,0" data-index-in-node="0">दिशा और वस्त्र:</strong> स्नान कर साफ और ढीले वस्त्र पहनें. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है.</p>
<p data-path-to-node="9,1,0"><strong data-path-to-node="9,1,0" data-index-in-node="0">जल तैयार करें:</strong> लोटे में जल भरें. उसमें गंगाजल, थोड़ा कच्चा दूध, काले तिल और थोड़े अक्षत (चावल) मिला लें. अपने अनामिका (रिंग फिंगर) उंगली में कुशा की पवित्री (अंगूठी) पहनें.</p>
<p data-path-to-node="9,2,0"><strong data-path-to-node="9,2,0" data-index-in-node="0">मातृ स्मरण:</strong> दोनों हाथ जोड़कर अपनी दिवंगत माता, दादी, नानी या जिस भी मातृ शक्ति का श्राद्ध कर रहे हैं, उनका ध्यान करें. मन ही मन कहें, <strong>"हे मातृ शक्ति! मैं आपको श्रद्धापूर्वक जल अर्पित कर रहा/रही हूं, कृपया इसे स्वीकार कर हमें आशीर्वाद दें."</strong></p>
<p data-path-to-node="9,3,0"><strong data-path-to-node="9,3,0" data-index-in-node="0">जलांजलि दें:</strong> दोनों हथेलियों को मिलाकर जल लें. अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच वाले भाग (पितृ तीर्थ) से जल को किसी बड़े बर्तन या थाली में धीरे-धीरे छोड़ें.</p>
<p data-path-to-node="9,4,0"><strong data-path-to-node="9,4,0" data-index-in-node="0">मंत्र का जप:</strong> जल छोड़ते समय तीन बार कहें: <strong data-path-to-node="9,4,1" data-index-in-node="0">"तृप्यन्ताम् इदं जलं तस्मै/तस्यै स्वधा नमः"</strong></p>
<p data-path-to-node="9,4,2"><strong>(संस्कृत मंत्र न बोल पाएं, तो सीधे कहें: 'हे मां, मैं आपको यह तर्पण अर्पित करता हूं, आप तृप्त हों.')</strong> ऐसा कम से कम 3 बार करें.</p>
<h3 data-path-to-node="11">पंचबली भोग जरूर निकालें</h3>
<p data-path-to-node="12">तर्पण के बाद घर में बने सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज) से 5 छोटे-छोटे हिस्से जरूर निकालें. इन्हें इन पांचों को अर्पित करें:</p>
<ul>
<li data-path-to-node="13,0,0"><strong data-path-to-node="13,0,0" data-index-in-node="0">गाय (गो ग्रास):</strong> सुख और समृद्धि के लिए</li>
<li data-path-to-node="13,1,0"><strong data-path-to-node="13,1,0" data-index-in-node="0">कुत्ता (श्वान बलि):</strong> संकटों से रक्षा के लिए</li>
<li data-path-to-node="13,2,0"><strong data-path-to-node="13,2,0" data-index-in-node="0">कौआ (काक बलि):</strong> पितरों की सीधी तृप्ति के लिए</li>
<li data-path-to-node="13,3,0"><strong data-path-to-node="13,3,0" data-index-in-node="0">देवता:</strong> ईश्वरीय कृपा के लिए (अग्नि में आहुति दें)</li>
<li data-path-to-node="13,4,0"><strong data-path-to-node="13,4,0" data-index-in-node="0">चींटियां (कीट बलि):</strong> सूक्ष्म जीवों की संतुष्टि के लिए</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="15">इन बातों का रखें विशेष ध्यान</h3>
<p data-path-to-node="16,0,0">श्राद्ध और तर्पण का सबसे उत्तम समय दोपहर 11:30 से 12:30 बजे (कुतुप और रौहिण मुहूर्त) के बीच माना जाता है.</p>
<p data-path-to-node="16,1,0">इस दिन सात्विक भोजन बनाएं. भोजन में खीर और पूड़ी शामिल करना बहुत शुभ माना जाता है.</p>
<p data-path-to-node="16,2,0">तर्पण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद महिला या कन्या को फल, अन्न या वस्त्र का दान करें. यदि संभव हो तो किसी मंदिर में सीधा (कच्चा राशन) भिजवा दें.</p>
<p data-path-to-node="17">शास्त्रों में कहा गया है कि 'भावो ही विद्यते देवः' यानी ईश्वर और पितृ केवल भाव के भूखे होते हैं. बिना किसी आडंबर के यदि आप सच्चे मन से यह 10 मिनट का तर्पण करेंगे, तो माताओं का भरपूर आशीर्वाद आपके परिवार पर बना रहेगा.</p>
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<p data-path-to-node="17"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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