20 Oct 2026, 08:02 PM
नवरात्रि पर श्रीनगर के ऐतिहासिक दुर्गा नाग मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, घाटी में शांति के लिए विशेष प्रार्थना
ABP News
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<p><strong data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर):</strong> शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर कश्मीर घाटी का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है. नवरात्रि के दूसरे दिन श्रीनगर के डलगेट इलाके में मौजूद ऐतिहासिक <strong data-path-to-node="1" data-index-in-node="169">दुर्गा नाग मंदिर</strong> में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. सुबह से ही मंदिर परिसर में माता के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी.</p>
<p>इस दौरान एक विशेष महापूजा का आयोजन हुआ, जिसमें शामिल सैकड़ों भक्तों ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर पूरे जम्मू-कश्मीर में अमन, शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की.</p>
<h3 data-path-to-node="4">आस्था का केंद्र: शंकराचार्य पहाड़ी की गोद में बसा धाम</h3>
<p data-path-to-node="5">डलगेट में प्रसिद्ध शंकराचार्य पहाड़ी की तलहटी में स्थित यह मंदिर सदियों पुराना और ऐतिहासिक है. नवरात्रि के इन नौ पवित्र दिनों के दौरान यह स्थान स्थानीय कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनियों से भव्य रूप से सजाया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ आने मात्र से मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है.</p>
<h3 data-path-to-node="6">कलश यात्रा और पारंपरिक अनुष्ठान से हुई शुरुआत</h3>
<p data-path-to-node="7">उत्सव की शुरुआत नवरात्रि के पहले दिन पारंपरिक <strong data-path-to-node="7" data-index-in-node="46">'घटस्थापना'</strong> (पवित्र कलश की स्थापना) के साथ विधिवत संपन्न हुई. इस दौरान एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई. कश्मीरी सनातन परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु पवित्र नदी और स्थानीय प्राकृतिक जल स्रोतों (झरनों) से जल भरकर मंदिर परिसर लेकर आए, जिससे घटस्थापना और पूजा-अर्चना के विधान शुरू किए गए. पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन का आयोजन किया जा रहा है.</p>
<h3 data-path-to-node="8">प्राचीन 'शक्ति पूजा' परंपरा और आदि शंकराचार्य का संबंध</h3>
<p data-path-to-node="9">दुर्गा नाग मंदिर की जड़ें कश्मीर की सदियों पुरानी <strong data-path-to-node="9" data-index-in-node="50">'शक्ति पूजा'</strong> परंपरा से जुड़ी हैं. इतिहास और मान्यताओं के अनुसार:</p>
<ul>
<li data-path-to-node="10,0,0"><strong data-path-to-node="10,0,0" data-index-in-node="0">शारदा मठ के रूप में पहचान:</strong> इस पवित्र स्थल को पहले 'शारदा मठ' के नाम से जाना जाता था.</li>
<li data-path-to-node="10,1,0"><strong data-path-to-node="10,1,0" data-index-in-node="0">आदि शंकराचार्य का आगमन:</strong> मान्यता है कि 8वीं शताब्दी ईस्वी में जब जगद्गुरु आदि शंकराचार्य कश्मीर प्रवास पर आए थे, तब वे इसी पावन स्थल पर ठहरे थे और साधना की थी.</li>
<li data-path-to-node="10,2,0"><strong data-path-to-node="10,2,0" data-index-in-node="0">शक्ति और शिव का अद्भुत संगम:</strong> परिसर में माँ दुर्गा और देवाधिदेव महादेव (भगवान शिव) दोनों के विग्रह स्थापित हैं, जो शैव और शाक्त परंपरा के सुंदर समन्वय को दर्शाते हैं.</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="11">क्या है 'दुर्गा नाग' नाम का रहस्य?</h3>
<p data-path-to-node="12">कश्मीरी भाषा में प्राकृतिक जल स्रोतों या भूमिगत मीठे पानी के झरनों को <strong data-path-to-node="12" data-index-in-node="70">'नाग'</strong> कहा जाता है. मंदिर परिसर के भीतर एक अत्यंत पवित्र और अविरल भूमिगत जल स्रोत बहता है. इस प्राकृतिक जल कुंड (नाग) के कारण ही इस धाम का नाम 'दुर्गा नाग' पड़ा. श्रद्धालु इस पवित्र जल को चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं.</p>
<h4 class="abp-article-title"><strong><a href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/kal-ka-rashifal-20-october-2026-horoscope-tomorrow-mesh-to-meen-rashi-3203846">Kal Ka Rashifal 20 October 2026: विजयादशमी पर शूल व मालव्य योग से धनु को इंटरनेशनल डील और मकर को बड़ा सम्मान!; पढ़ें 12 राशियों का राशिफल</a></strong></h4>
<p data-path-to-node="12"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p>इस दौरान एक विशेष महापूजा का आयोजन हुआ, जिसमें शामिल सैकड़ों भक्तों ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर पूरे जम्मू-कश्मीर में अमन, शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की.</p>
<h3 data-path-to-node="4">आस्था का केंद्र: शंकराचार्य पहाड़ी की गोद में बसा धाम</h3>
<p data-path-to-node="5">डलगेट में प्रसिद्ध शंकराचार्य पहाड़ी की तलहटी में स्थित यह मंदिर सदियों पुराना और ऐतिहासिक है. नवरात्रि के इन नौ पवित्र दिनों के दौरान यह स्थान स्थानीय कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनियों से भव्य रूप से सजाया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ आने मात्र से मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है.</p>
<h3 data-path-to-node="6">कलश यात्रा और पारंपरिक अनुष्ठान से हुई शुरुआत</h3>
<p data-path-to-node="7">उत्सव की शुरुआत नवरात्रि के पहले दिन पारंपरिक <strong data-path-to-node="7" data-index-in-node="46">'घटस्थापना'</strong> (पवित्र कलश की स्थापना) के साथ विधिवत संपन्न हुई. इस दौरान एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई. कश्मीरी सनातन परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु पवित्र नदी और स्थानीय प्राकृतिक जल स्रोतों (झरनों) से जल भरकर मंदिर परिसर लेकर आए, जिससे घटस्थापना और पूजा-अर्चना के विधान शुरू किए गए. पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन का आयोजन किया जा रहा है.</p>
<h3 data-path-to-node="8">प्राचीन 'शक्ति पूजा' परंपरा और आदि शंकराचार्य का संबंध</h3>
<p data-path-to-node="9">दुर्गा नाग मंदिर की जड़ें कश्मीर की सदियों पुरानी <strong data-path-to-node="9" data-index-in-node="50">'शक्ति पूजा'</strong> परंपरा से जुड़ी हैं. इतिहास और मान्यताओं के अनुसार:</p>
<ul>
<li data-path-to-node="10,0,0"><strong data-path-to-node="10,0,0" data-index-in-node="0">शारदा मठ के रूप में पहचान:</strong> इस पवित्र स्थल को पहले 'शारदा मठ' के नाम से जाना जाता था.</li>
<li data-path-to-node="10,1,0"><strong data-path-to-node="10,1,0" data-index-in-node="0">आदि शंकराचार्य का आगमन:</strong> मान्यता है कि 8वीं शताब्दी ईस्वी में जब जगद्गुरु आदि शंकराचार्य कश्मीर प्रवास पर आए थे, तब वे इसी पावन स्थल पर ठहरे थे और साधना की थी.</li>
<li data-path-to-node="10,2,0"><strong data-path-to-node="10,2,0" data-index-in-node="0">शक्ति और शिव का अद्भुत संगम:</strong> परिसर में माँ दुर्गा और देवाधिदेव महादेव (भगवान शिव) दोनों के विग्रह स्थापित हैं, जो शैव और शाक्त परंपरा के सुंदर समन्वय को दर्शाते हैं.</li>
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<p data-path-to-node="12">कश्मीरी भाषा में प्राकृतिक जल स्रोतों या भूमिगत मीठे पानी के झरनों को <strong data-path-to-node="12" data-index-in-node="70">'नाग'</strong> कहा जाता है. मंदिर परिसर के भीतर एक अत्यंत पवित्र और अविरल भूमिगत जल स्रोत बहता है. इस प्राकृतिक जल कुंड (नाग) के कारण ही इस धाम का नाम 'दुर्गा नाग' पड़ा. श्रद्धालु इस पवित्र जल को चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं.</p>
<h4 class="abp-article-title"><strong><a href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/kal-ka-rashifal-20-october-2026-horoscope-tomorrow-mesh-to-meen-rashi-3203846">Kal Ka Rashifal 20 October 2026: विजयादशमी पर शूल व मालव्य योग से धनु को इंटरनेशनल डील और मकर को बड़ा सम्मान!; पढ़ें 12 राशियों का राशिफल</a></strong></h4>
<p data-path-to-node="12"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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