08 Oct 2026, 08:03 PM
Guru Pradosh Vrat 2026: आज गुरु प्रदोष पर व्रत नहीं रखा तो क्या शाम की शिव पूजा कर सकते हैं? जानें क्या कहती है परंपरा
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Pradosh Vrat 2026:</strong> सुबह नाश्ता कर लिया. दोपहर का खाना भी खा लिया. अब पता चला कि आज गुरु प्रदोष है. ऐसे में मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या शाम को शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं? बिना व्रत रखे मंदिर जाना और प्रदोष की पूजा करना सही होगा?</p>
<p style="text-align: justify;">जवाब है हां, व्रत नहीं रखा है, तब भी शाम को भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. लेकिन उपवास सहित प्रदोष व्रत का पालन और प्रदोष काल में शिव पूजा करना, दोनों में अंतर है. शाम की पूजा को पूरे दिन रखे गए व्रत के बराबर बताना भी सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आज 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को गुरु प्रदोष है. उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है. गुरुवार को पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है.</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=hQoCyQ90HMAvVMR4" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<h3 style="text-align: justify;">व्रत नहीं रखा तो पूजा क्यों कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">प्रदोष व्रत की परंपरागत विधि में उपवास और संध्या की पूजा, दोनों का स्थान है. मगर शिव दर्शन, जल अर्पण और नाम जप को केवल व्रत रखने वालों तक सीमित समझना उचित नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वामी शिवानंद की पुस्तक हिंदू फास्ट्स एंड फेस्टिवल्स के 'प्रदोष व्रत' अध्याय में व्रती के लिए उपवास और पूजा की विधि बताई गई है. उसी अध्याय में प्रदोष के समय शिव दर्शन, बेलपत्र अर्पित करने और दीप जलाने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है. इससे यह अंतर समझ आता है कि विधिपूर्वक व्रत रखना एक अनुष्ठान है, जबकि प्रदोष के समय शिव की उपासना में दूसरे श्रद्धालु भी शामिल हो सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए नौकरी, यात्रा, घरेलू जिम्मेदारियों या किसी अन्य कारण से आज व्रत नहीं रख पाए हैं, तो शाम की पूजा छोड़ने की जरूरत नहीं है. आप घर में शिवजी का स्मरण कर सकते हैं या मंदिर जाकर दर्शन कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">खाना खा लिया है तो क्या जल चढ़ा सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">सिर्फ भोजन कर लेने के कारण सामान्य शिव पूजा से वंचित मान लेना ठीक नहीं है. पूजा से पहले हाथ-पैर धो लें, मुंह साफ कर लें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. स्नान करना संभव हो तो कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यहां एक बात समझना जरूरी है. अगर आपने सुबह व्रत का संकल्प लिया ही नहीं था, तो भोजन करने को 'व्रत टूटना' नहीं कहा जाएगा. आपने उस दिन उपवास नहीं रखा है; अब शाम को श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन यदि पहले से प्रदोष व्रत का संकल्प लिया था और उसके नियम का पालन नहीं हो पाया, तो वह अलग स्थिति है. विशेषकर निश्चित संख्या में प्रदोष व्रत रखने वाले लोग अपने परिवार की परंपरा या अनुष्ठान कराने वाले आचार्य से आगे की विधि पूछ सकते हैं. संकल्पित व्रत के नियम और सामान्य पूजा की सलाह को एक जैसा नहीं मानना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शाम शिव पूजा का समय क्या है?</h3>
<p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में आज प्रदोष पूजा का समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक है. दूसरे शहरों में सूर्यास्त के अनुसार समय बदल सकता है. अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग का समय देखें.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रदोष की विशेष पूजा संध्या में की जाती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि इस अवधि के बाहर शिवजी का स्मरण या सामान्य पूजा नहीं कर सकते. मंदिर जाने से पहले वहां की संध्या आरती और दर्शन का समय भी देख लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बिना व्रत शाम की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">घर में सामान्य शिव पूजा के लिए लंबी सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है. स्वच्छ जल, उपलब्ध फूल या बेलपत्र और एक दीपक से भी पूजा कर सकते हैं. शिवलिंग हो तो जल अर्पित करें. शिवजी का चित्र हो तो उसके सामने दीप जलाकर प्रार्थना करें, इसके साथ ही-</p>
<p style="text-align: justify;">- पहले गणेशजी का स्मरण करें, फिर शिव-पार्वती को प्रणाम करें.<br />- शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें. मंदिर में वहां की व्यवस्था का पालन करें.<br />- उपलब्ध हो तो बेलपत्र या फूल चढ़ाएं.<br />- शांत मन से 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें.<br />- आरती करके अपनी प्रार्थना कहें.</p>
<p style="text-align: justify;">यह सामान्य घरेलू पूजा का सरल तरीका है. इसे विधिपूर्वक संकल्पित प्रदोष व्रत की पूरी अनुष्ठान विधि का विकल्प न समझें. परिवार या मंदिर की अलग पूजा परंपरा हो तो उसका पालन करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जवाब है हां, व्रत नहीं रखा है, तब भी शाम को भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. लेकिन उपवास सहित प्रदोष व्रत का पालन और प्रदोष काल में शिव पूजा करना, दोनों में अंतर है. शाम की पूजा को पूरे दिन रखे गए व्रत के बराबर बताना भी सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आज 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को गुरु प्रदोष है. उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है. गुरुवार को पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है.</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=hQoCyQ90HMAvVMR4" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<h3 style="text-align: justify;">व्रत नहीं रखा तो पूजा क्यों कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">प्रदोष व्रत की परंपरागत विधि में उपवास और संध्या की पूजा, दोनों का स्थान है. मगर शिव दर्शन, जल अर्पण और नाम जप को केवल व्रत रखने वालों तक सीमित समझना उचित नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वामी शिवानंद की पुस्तक हिंदू फास्ट्स एंड फेस्टिवल्स के 'प्रदोष व्रत' अध्याय में व्रती के लिए उपवास और पूजा की विधि बताई गई है. उसी अध्याय में प्रदोष के समय शिव दर्शन, बेलपत्र अर्पित करने और दीप जलाने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है. इससे यह अंतर समझ आता है कि विधिपूर्वक व्रत रखना एक अनुष्ठान है, जबकि प्रदोष के समय शिव की उपासना में दूसरे श्रद्धालु भी शामिल हो सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए नौकरी, यात्रा, घरेलू जिम्मेदारियों या किसी अन्य कारण से आज व्रत नहीं रख पाए हैं, तो शाम की पूजा छोड़ने की जरूरत नहीं है. आप घर में शिवजी का स्मरण कर सकते हैं या मंदिर जाकर दर्शन कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">खाना खा लिया है तो क्या जल चढ़ा सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">सिर्फ भोजन कर लेने के कारण सामान्य शिव पूजा से वंचित मान लेना ठीक नहीं है. पूजा से पहले हाथ-पैर धो लें, मुंह साफ कर लें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. स्नान करना संभव हो तो कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यहां एक बात समझना जरूरी है. अगर आपने सुबह व्रत का संकल्प लिया ही नहीं था, तो भोजन करने को 'व्रत टूटना' नहीं कहा जाएगा. आपने उस दिन उपवास नहीं रखा है; अब शाम को श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन यदि पहले से प्रदोष व्रत का संकल्प लिया था और उसके नियम का पालन नहीं हो पाया, तो वह अलग स्थिति है. विशेषकर निश्चित संख्या में प्रदोष व्रत रखने वाले लोग अपने परिवार की परंपरा या अनुष्ठान कराने वाले आचार्य से आगे की विधि पूछ सकते हैं. संकल्पित व्रत के नियम और सामान्य पूजा की सलाह को एक जैसा नहीं मानना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शाम शिव पूजा का समय क्या है?</h3>
<p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में आज प्रदोष पूजा का समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक है. दूसरे शहरों में सूर्यास्त के अनुसार समय बदल सकता है. अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग का समय देखें.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रदोष की विशेष पूजा संध्या में की जाती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि इस अवधि के बाहर शिवजी का स्मरण या सामान्य पूजा नहीं कर सकते. मंदिर जाने से पहले वहां की संध्या आरती और दर्शन का समय भी देख लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बिना व्रत शाम की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">घर में सामान्य शिव पूजा के लिए लंबी सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है. स्वच्छ जल, उपलब्ध फूल या बेलपत्र और एक दीपक से भी पूजा कर सकते हैं. शिवलिंग हो तो जल अर्पित करें. शिवजी का चित्र हो तो उसके सामने दीप जलाकर प्रार्थना करें, इसके साथ ही-</p>
<p style="text-align: justify;">- पहले गणेशजी का स्मरण करें, फिर शिव-पार्वती को प्रणाम करें.<br />- शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें. मंदिर में वहां की व्यवस्था का पालन करें.<br />- उपलब्ध हो तो बेलपत्र या फूल चढ़ाएं.<br />- शांत मन से 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें.<br />- आरती करके अपनी प्रार्थना कहें.</p>
<p style="text-align: justify;">यह सामान्य घरेलू पूजा का सरल तरीका है. इसे विधिपूर्वक संकल्पित प्रदोष व्रत की पूरी अनुष्ठान विधि का विकल्प न समझें. परिवार या मंदिर की अलग पूजा परंपरा हो तो उसका पालन करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
Read Full Story
2
Comments (0)