अक्टूबर में बदल रही 2 बड़े ग्रहों की चाल: 5 दुर्लभ योगों के बीच जानें प्रभाव और उपाय
01 Oct 2026, 06:52 PM

अक्टूबर में बदल रही 2 बड़े ग्रहों की चाल: 5 दुर्लभ योगों के बीच जानें प्रभाव और उपाय

ABP News
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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="3"><strong>October 2026 Planetary Transits:</strong> ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके राशि परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. एक निश्चित अंतराल पर ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन, देश की राजनीति और वैश्विक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4">पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक एवं ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, अक्टूबर माह में सूर्य और देवगुरु बृहस्पति राशि परिवर्तन करेंगे. इसके साथ ही शुक्र और बुध ग्रह वक्री अवस्था में जाएंगे और उनका अस्त व उदय भी होगा.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qC5oxd58sbM?si=8yGnPZ5JoOCuTlPN" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<h3 style="text-align: justify;" data-path-to-node="8">अक्टूबर में ग्रहों के गोचर, वक्री व अस्त-उदय की तिथियां</h3>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="9">ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास द्वारा साझा की गई पंचांगीय गणना के अनुसार प्रमुख ग्रहों की स्थितियां इस प्रकार रहेंगी:</p>
<table data-path-to-node="10">
<thead>
<tr>
<td><strong>ग्रह</strong></td>
<td><strong>घटना / स्थिति</strong></td>
<td><strong>तिथि व समय</strong></td>
<td><strong>राशि / नक्षत्र प्रभाव</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,1,0,0"><strong data-path-to-node="10,1,0,0" data-index-in-node="0">शुक्र</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,1,0">वक्री चाल</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,2,0">03 अक्टूबर, दोपहर 12:44 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,1,3,0">अपनी स्वराशि तुला में</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,2,0,0"><strong data-path-to-node="10,2,0,0" data-index-in-node="0">शुक्र</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,1,0">पूर्व दिशा में अस्त</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,2,0">14 अक्टूबर, रात्रि 12:18 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,2,3,0">तुला राशि</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,3,0,0"><strong data-path-to-node="10,3,0,0" data-index-in-node="0">सूर्य</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,3,1,0">तुला राशि में प्रवेश (नीच राशि)</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,3,2,0">17 अक्टूबर, शाम 07:50 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,3,3,0">तुला राशि गोचर</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,4,0,0"><strong data-path-to-node="10,4,0,0" data-index-in-node="0">बुध</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,4,1,0">वक्री चाल</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,4,2,0">24 अक्टूबर, दोपहर 12:30 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,4,3,0">तुला राशि</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,5,0,0"><strong data-path-to-node="10,5,0,0" data-index-in-node="0">शुक्र</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,5,1,0">नक्षत्र परिवर्तन</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,5,2,0">24 अक्टूबर</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,5,3,0">चित्रा नक्षत्र में प्रवेश</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,6,0,0"><strong data-path-to-node="10,6,0,0" data-index-in-node="0">बुध</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,6,1,0">पश्चिम दिशा में अस्त</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,6,2,0">28 अक्टूबर, सुबह 06:32 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,6,3,0">तुला राशि</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,7,0,0"><strong data-path-to-node="10,7,0,0" data-index-in-node="0">शुक्र</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,7,1,0">पश्चिम दिशा में उदय</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,7,2,0">28 अक्टूबर, सुबह 07:36 बजे</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,7,3,0">तुला राशि</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span data-path-to-node="10,8,0,0"><strong data-path-to-node="10,8,0,0" data-index-in-node="0">गुरु</strong></span></td>
<td><span data-path-to-node="10,8,1,0">सिंह राशि में प्रवेश</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,8,2,0">31 अक्टूबर</span></td>
<td><span data-path-to-node="10,8,3,0">कर्क से निकलकर सिंह में गोचर</span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: justify;">इसके अतिरिक्त शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में बने रहेंगे, जबकि राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में विराजमान रहेंगे.</p>
<h3 style="text-align: justify;">17 अक्टूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश</h3>
<p style="text-align: justify;">सूर्य को नवग्रहों का राजा माना जाता है. कुंडली में सूर्य के मजबूत होने पर मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. वहीं शरीर में यह पेट, आंखों, दिल, चेहरे और हड्डियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">17 अक्टूबर को शाम 7:50 बजे सूर्य तुला राशि में गोचर करेंगे. तुला राशि सूर्य की 'नीच' राशि मानी जाती है. ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, यह गोचर जातक के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. विशेष रूप से तुला राशि के जातकों को इस अवधि में सतर्क रहने की सलाह दी गई है; उन पर झूठे आरोप लगने, अपयश मिलने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की संभावना बन सकती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>31 अक्टूबर को गुरु करेंगे सिंह राशि में गोचर</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">31 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और विस्तार का कारक माना जाता है. सिंह राशि में गुरु का यह गोचर व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बुध और शुक्र की वक्री गति का प्रभाव</h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>बुध की वक्री चाल:</strong> 24 अक्टूबर से बुध के वक्री होने के कारण व्यापारिक समझौतों, कागजी कार्यों और बातचीत में सावधानी बरतनी होगी. माह के अंत में बुध और मंगल का संबंध भी स्थिति को अधिक संवेदनशील बनाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुक्र की वक्री चाल:</strong> 3 अक्टूबर से स्वराशि तुला में वक्री होने के कारण प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, कला और सुख-सुविधाओं से जुड़े फैसलों में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं. 24 अक्टूबर को शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अक्टूबर में बनेंगे ये 5 बड़े ज्योतिषीय योग</h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>त्रिग्रही योग (4 से 6 अक्टूबर):</strong> कर्क राशि में चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति की युति से यह योग बनेगा. चंद्रमा की तीव्र गति के कारण यह अल्पकालिक रहेगा, लेकिन इसका प्रभाव कई राशियों पर स्पष्ट दिखेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बुधादित्य योग (17 अक्टूबर से):</strong> तुला राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा, जो बुद्धि, वाणी और नेतृत्व क्षमता के लिए अनुकूल माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लक्ष्मी नारायण योग:</strong> तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से यह योग बनेगा. यह आर्थिक स्थिति, व्यापार और भौतिक वैभव के दृष्टिकोण से विशेष माना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मालव्य योग:</strong> शुक्र के अपनी स्वराशि तुला में होने से पंच महापुरुष योगों में शामिल 'मालव्य योग' निर्मित होगा, जो कला, आकर्षण और समृद्धि का कारक है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुक्रादित्य योग (17 अक्टूबर से 6 नवंबर):</strong> <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a> में सूर्य और शुक्र की युति से बनने वाला यह योग करियर, मान-सम्मान और रचनात्मक क्षेत्रों को प्रभावित करेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">देश, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव</h3>
<p style="text-align: justify;">ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इन ग्रह परिवर्तनों से देश और दुनिया में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राजनीति:</strong> देश की राजनीति में बड़े बदलाव होंगे. युवाओं और नए चेहरों को आगे आने का अवसर मिलेगा, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को नुकसान हो सकता है. शासन-प्रशासन और राजनीतिक दलों में तीखा संघर्ष दिखेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सीमा व सुरक्षा:</strong> पड़ोसी देशों से तनाव बढ़ने और विवादों की आशंका है. आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर अपराध और तनाव बढ़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>व्यापार एवं बाजार:</strong> व्यापार में तेजी आएगी. लोहा, इस्पात, चिकित्सा और केमिकल क्षेत्र उन्नति करेंगे. किसानों को लाभ होगा और अन्न उत्पादन बढ़ेगा. हालांकि, <a title="सोने की कीमत" href="https://www.abplive.com/gold-prices" data-type="interlinkingkeywords">सोने की कीमत</a>ों और विदेशी मुद्रा में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा. पेट्रोल, डीजल और खाद्य तेल के दाम बढ़ने के अनुमान हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्राकृतिक व अन्य घटनाएं:</strong> <a title="भूकंप" href="https://www.abplive.com/topic/earthquake" data-type="interlinkingkeywords">भूकंप</a>, आगजनी, तूफान, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका जताई गई है. साथ ही सड़क, बस, रेल और वायुयान दुर्घटनाओं को लेकर भी सतर्क रहने का संकेत है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>शांति और सुरक्षा के लिए अनुशंसित उपाय</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">प्रतिकूल ग्रह प्रभावों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए डा. व्यास ने निम्नलिखित उपायों की सलाह दी है:</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>मंत्र जाप:</strong> प्रतिदिन <strong>हं हनुमते नमः, ॐ नमः शिवाय अथवा हं पवननंदनाय स्वाहा</strong> का जाप करें. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ भी विशेष फलदायी है.</li>
<li><strong>दीपक प्रज्वलन:</strong> प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं.</li>
<li><strong>हनुमान आराधना:</strong> शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में लाल मसूर की दाल चढ़ाएं तथा पान और दो बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं.</li>
<li><strong>ईश्वर भक्ति:</strong> भगवान शिव, माता दुर्गा और हनुमान जी की नियमित आराधना से ग्रह दोषों की शांति होती है.</li>
</ul>
<h4 class="abp-article-title" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/navratri-2026-ashtami-date-18-or-19-october-kanya-pujan-3193125">Navratri Ashtami 2026 Date: अष्टमी 18 या 19 अक्टूबर? जानें कन्या पूजन कब करें</a></strong></h4>
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Source Credit: abplive.com
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