21 Oct 2026, 11:22 PM
पूरी दुनिया में चीनी का अकाल, बढ़ेंगे दाम, 6.28 मिलियन टन की हुई कमी
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">त्योहारी सीजन से पहले चीनी की सप्लाई को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, मार्केट एनालिस्ट 'ग्रीन पूल कमोडिटीज' ने अनुमान लगाया है कि साल 2026-27 में वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई में 6.28 मिलियन टन तक कमी आ सकती है. इसकी बड़ी वजह मौसम की मार और खराब फसल है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ब्राजील, भारत और यूरोपीय यूनियन में चीनी के प्रोडक्शन में भारी गिरावट आई है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">चीनी पर क्या है नया संकट?</h3>
<p style="text-align: justify;">'एल नीनो' की वजह से ब्राजील में बेमौसम हुई अत्यधिक बारिश से ब्राजील में इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 14% कम हुआ है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रीन पूल ने ब्राजील के मध्य-दक्षिणी क्षेत्र के लिए अपने चीनी उत्पादन के अनुमान को 600 हजार टन घटाकर 37.3 मिलियन टन कर दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">खराब मौसम के कारण यूरोपीय संघ में भी चीनी उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है. यहां गर्मियों के दौरान लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने 'शुगर बीट' (चुकंदर) की पैदावार पर बुरा असर डाला है, जिसके चलते ग्रीन पूल को यहां भी अपने उत्पादन अनुमानों में बदलाव करना पड़ा है. इस अनुमान को 228 हजार टन घटाकर 12.44 मिलियन टन कर दिया गया है. 'ग्रीन पूल' का मानना है कि आने वाले समय में इन अनुमानों में और भी कटौती हो सकती है, जिससे यूरोपीय चीनी बाजार में आपूर्ति तंग हो सकती है और इस क्षेत्र की आयात मांग पर असर पड़ सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">भारत के लिए क्या है स्थिति?</h3>
<p style="text-align: justify;">भारत में आपूर्ति में और कमी आने की आशंका है, क्योंकि घरेलू स्टॉक सीमित होने के कारण सरकार ने गन्ने की नई फसल की प्रोसेसिंग जल्दी शुरू करने का फैसला किया है. हालांकि, गन्ने के पूरी तरह पकने से पहले ही उसकी कटाई करने से चीनी के उत्पादन में 300-400 हजार टन का नुकसान हो सकता है. महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में मानसून के आखिर में कम बारिश होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">पानी की कमी के कारण खेती के लिए जलाशयों के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियाँ लग सकती हैं, जिससे भविष्य के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा हो सकते हैं. आपूर्ति में इस भारी कमी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे चीनी के वायदा भाव 19 महीने के उच्च स्तर (21.29 सेंट प्रति पाउंड) पर पहुंच गए हैं. कीमतों में आगे होने वाला बदलाव ब्राजील भारत और यूरोपीय संघ (EU) में होने वाले वास्तविक उत्पादन और <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a> की स्थिति पर निर्भर करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="20 October से लागू हुआ India-New Zealand FTA! 100% Indian Products को Duty-Free Entry | Paisa Live" src="https://www.youtube.com/embed/SnhclCcNbHs" width="833" height="469" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें:</strong></p>
<p class="abp-article-title" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/business/donald-trump-announced-harvest-fuel-relief-program-8-billion-dollar-worth-of-diesel-to-be-distributed-to-us-farmers-3204657">डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, किसानों को 8 बिलियन डॉलर का डीजल बांटेंगे</a></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;">चीनी पर क्या है नया संकट?</h3>
<p style="text-align: justify;">'एल नीनो' की वजह से ब्राजील में बेमौसम हुई अत्यधिक बारिश से ब्राजील में इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 14% कम हुआ है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रीन पूल ने ब्राजील के मध्य-दक्षिणी क्षेत्र के लिए अपने चीनी उत्पादन के अनुमान को 600 हजार टन घटाकर 37.3 मिलियन टन कर दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">खराब मौसम के कारण यूरोपीय संघ में भी चीनी उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है. यहां गर्मियों के दौरान लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने 'शुगर बीट' (चुकंदर) की पैदावार पर बुरा असर डाला है, जिसके चलते ग्रीन पूल को यहां भी अपने उत्पादन अनुमानों में बदलाव करना पड़ा है. इस अनुमान को 228 हजार टन घटाकर 12.44 मिलियन टन कर दिया गया है. 'ग्रीन पूल' का मानना है कि आने वाले समय में इन अनुमानों में और भी कटौती हो सकती है, जिससे यूरोपीय चीनी बाजार में आपूर्ति तंग हो सकती है और इस क्षेत्र की आयात मांग पर असर पड़ सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">भारत के लिए क्या है स्थिति?</h3>
<p style="text-align: justify;">भारत में आपूर्ति में और कमी आने की आशंका है, क्योंकि घरेलू स्टॉक सीमित होने के कारण सरकार ने गन्ने की नई फसल की प्रोसेसिंग जल्दी शुरू करने का फैसला किया है. हालांकि, गन्ने के पूरी तरह पकने से पहले ही उसकी कटाई करने से चीनी के उत्पादन में 300-400 हजार टन का नुकसान हो सकता है. महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में मानसून के आखिर में कम बारिश होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">पानी की कमी के कारण खेती के लिए जलाशयों के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियाँ लग सकती हैं, जिससे भविष्य के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा हो सकते हैं. आपूर्ति में इस भारी कमी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे चीनी के वायदा भाव 19 महीने के उच्च स्तर (21.29 सेंट प्रति पाउंड) पर पहुंच गए हैं. कीमतों में आगे होने वाला बदलाव ब्राजील भारत और यूरोपीय संघ (EU) में होने वाले वास्तविक उत्पादन और <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a> की स्थिति पर निर्भर करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="20 October से लागू हुआ India-New Zealand FTA! 100% Indian Products को Duty-Free Entry | Paisa Live" src="https://www.youtube.com/embed/SnhclCcNbHs" width="833" height="469" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
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Source Credit: abplive.com
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