07 Nov 2026, 07:43 PM
Diwali 2026: धन की देवी लक्ष्मी ने उल्लू को ही क्यों चुना अपना वाहन?
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Diwali 2026:&nbsp;</strong>माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू इसलिए बना क्योंकि कार्तिक अमावस्या की घनी काली रात में अपनी तेज नज़र और सतर्कता के दम पर वह सबसे पहले देवी तक पहुँचा था. यह संदर्भ सीधे तौर पर हर साल मनाए जाने वाले दीपोत्सव कार्तिक अमावस्या (दिवाली 2026) से जुड़ा है.</p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार, जब सभी देवी-देवता अपने प्रतिनिधि चुन रहे थे, तब पशु-पक्षियों के विवाद को शांत करने के लिए मां लक्ष्मी ने अमावस्या की रात सबसे पहले पहुँचने वाले को वाहन स्वीकार करने की शर्त रखी थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9wpBtKhLxkk" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">इसका सबसे अनूठा पहलू यह है कि उल्लू केवल एक निशाचर पक्षी नहीं, बल्कि धन और ऐश्वर्य की चकाचौंध के बीच इंसान को 'विवेक की आंखें' खुली रखने का गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है. आखिर घोर अंधेरे में उल्लू ने बाकी पक्षियों को कैसे पछाड़ा और इसका संबंध आपके घर में धन के स्थायित्व से कैसे है आइए इस पौराणिक कथा और इसके गूढ़ रहस्यों को विस्तार से समझते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जब पृथ्वी पर वाहन चुनने की मची होड़:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में एक बार सभी देवी-देवता पृथ्वी लोक पर विचरण के लिए आए. उस समय सभी देवगण अपने स्वभाव और शक्ति के अनुरूप अपने लिए वाहन चुन रहे थे. धन और वैभव की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के सामने भी यह प्रश्न आया कि वह किसे अपना प्रतिनिधि वाहन बनाएं.</p>
<p style="text-align: justify;">जैसे ही यह समाचार पृथ्वी लोक के जीवों तक पहुँचा, पशु-पक्षियों के बीच मां लक्ष्मी का सानिध्य पाने की होड़ मच गई. हर कोई चाहता था कि उसे धन की देवी की सेवा का सुअवसर मिले. विवाद इतना बढ़ गया कि सभी जीव आपस में उलझने लगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कार्तिक अमावस्या की परीक्षा और उल्लू का चयन:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विवाद को शांत कराने के लिए मां लक्ष्मी ने एक निष्पक्ष शर्त रखी. उन्होंने कहा, "मैं हर साल कार्तिक माह की अमावस्या की रात पृथ्वी लोक पर आऊंगी. उस घनी रात में जो भी जीव सबसे पहले मेरे पास पहुंचेगा, मैं उसी को अपना वाहन स्वीकार करूंगी."</p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक अमावस्या की रात जब आई, तो चारों ओर स्याह काला अंधकार छाया हुआ था. अधिकांश पशु-पक्षी अंधेरे के भय और दृष्टिहीनता के कारण अपने घोंसलों और गुफाओं से बाहर नहीं निकल सके. लेकिन उल्लू की प्रकृति अलग थी. उसकी आँखें रात के घुप अंधेरे में भी सबसे अधिक सक्रिय थीं.</p>
<p style="text-align: justify;">उल्लू ने अपनी तेज नज़र से दूर आकाश से धरती पर उतरतीं मां लक्ष्मी को देख लिया. बिना एक पल गंवाए उसने तीव्र गति से उड़ान भरी और माता के चरणों में जा पहुँचा. उसकी निष्ठा, सजगता और त्वरित निर्णय क्षमता से प्रसन्न होकर देवी ने उसे अपना वाहन चुन लिया. तभी से मां लक्ष्मी को 'उलूक वाहिनी' भी कहा जाने लगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>उल्लू के चयन का आध्यात्मिक व व्यावहारिक महत्व:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों में उल्लू का चयन केवल एक संयोग नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन की गहरी सीख है:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विवेक और संतुलन का प्रतीक:</strong> दिन के अत्यधिक उजाले में उल्लू की आंखें बंद सी रहती हैं और रात में खुली. यह दर्शाता है कि सांसारिक चकाचौंध और अत्यधिक धन देखकर मनुष्य को अंधा नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने विवेक को जागृत रखना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>संकट में सही अवसर की पहचान:</strong> जैसे उल्लू घने अंधेरे में भी अपना मार्ग खोज लेता है, वैसे ही बुद्धिमान व्यक्ति संकट और अज्ञान के दौर में भी सही निर्णय और नए अवसरों को पहचान लेता है.</p>
<p style="text-align: justify;">दिवाली की पावन रात जब आप मां लक्ष्मी की आराधना करें, तो धन के साथ-साथ उल्लू से मिलने वाले इस संयम, सतर्कता और विवेक को भी अपने जीवन में अवश्य स्थान दें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार, जब सभी देवी-देवता अपने प्रतिनिधि चुन रहे थे, तब पशु-पक्षियों के विवाद को शांत करने के लिए मां लक्ष्मी ने अमावस्या की रात सबसे पहले पहुँचने वाले को वाहन स्वीकार करने की शर्त रखी थी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9wpBtKhLxkk" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">इसका सबसे अनूठा पहलू यह है कि उल्लू केवल एक निशाचर पक्षी नहीं, बल्कि धन और ऐश्वर्य की चकाचौंध के बीच इंसान को 'विवेक की आंखें' खुली रखने का गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है. आखिर घोर अंधेरे में उल्लू ने बाकी पक्षियों को कैसे पछाड़ा और इसका संबंध आपके घर में धन के स्थायित्व से कैसे है आइए इस पौराणिक कथा और इसके गूढ़ रहस्यों को विस्तार से समझते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जब पृथ्वी पर वाहन चुनने की मची होड़:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में एक बार सभी देवी-देवता पृथ्वी लोक पर विचरण के लिए आए. उस समय सभी देवगण अपने स्वभाव और शक्ति के अनुरूप अपने लिए वाहन चुन रहे थे. धन और वैभव की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के सामने भी यह प्रश्न आया कि वह किसे अपना प्रतिनिधि वाहन बनाएं.</p>
<p style="text-align: justify;">जैसे ही यह समाचार पृथ्वी लोक के जीवों तक पहुँचा, पशु-पक्षियों के बीच मां लक्ष्मी का सानिध्य पाने की होड़ मच गई. हर कोई चाहता था कि उसे धन की देवी की सेवा का सुअवसर मिले. विवाद इतना बढ़ गया कि सभी जीव आपस में उलझने लगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कार्तिक अमावस्या की परीक्षा और उल्लू का चयन:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विवाद को शांत कराने के लिए मां लक्ष्मी ने एक निष्पक्ष शर्त रखी. उन्होंने कहा, "मैं हर साल कार्तिक माह की अमावस्या की रात पृथ्वी लोक पर आऊंगी. उस घनी रात में जो भी जीव सबसे पहले मेरे पास पहुंचेगा, मैं उसी को अपना वाहन स्वीकार करूंगी."</p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक अमावस्या की रात जब आई, तो चारों ओर स्याह काला अंधकार छाया हुआ था. अधिकांश पशु-पक्षी अंधेरे के भय और दृष्टिहीनता के कारण अपने घोंसलों और गुफाओं से बाहर नहीं निकल सके. लेकिन उल्लू की प्रकृति अलग थी. उसकी आँखें रात के घुप अंधेरे में भी सबसे अधिक सक्रिय थीं.</p>
<p style="text-align: justify;">उल्लू ने अपनी तेज नज़र से दूर आकाश से धरती पर उतरतीं मां लक्ष्मी को देख लिया. बिना एक पल गंवाए उसने तीव्र गति से उड़ान भरी और माता के चरणों में जा पहुँचा. उसकी निष्ठा, सजगता और त्वरित निर्णय क्षमता से प्रसन्न होकर देवी ने उसे अपना वाहन चुन लिया. तभी से मां लक्ष्मी को 'उलूक वाहिनी' भी कहा जाने लगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>उल्लू के चयन का आध्यात्मिक व व्यावहारिक महत्व:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों में उल्लू का चयन केवल एक संयोग नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन की गहरी सीख है:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विवेक और संतुलन का प्रतीक:</strong> दिन के अत्यधिक उजाले में उल्लू की आंखें बंद सी रहती हैं और रात में खुली. यह दर्शाता है कि सांसारिक चकाचौंध और अत्यधिक धन देखकर मनुष्य को अंधा नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने विवेक को जागृत रखना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>संकट में सही अवसर की पहचान:</strong> जैसे उल्लू घने अंधेरे में भी अपना मार्ग खोज लेता है, वैसे ही बुद्धिमान व्यक्ति संकट और अज्ञान के दौर में भी सही निर्णय और नए अवसरों को पहचान लेता है.</p>
<p style="text-align: justify;">दिवाली की पावन रात जब आप मां लक्ष्मी की आराधना करें, तो धन के साथ-साथ उल्लू से मिलने वाले इस संयम, सतर्कता और विवेक को भी अपने जीवन में अवश्य स्थान दें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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