05 Nov 2026, 10:58 AM
Diwali 2026: पांच नहीं छह दिन का महापर्व, जानें धनतेरस से भाईदूज की तिथि
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Diwali 2026:&nbsp;</strong>हिंदू पंचांग में तिथियों की घट-बढ़ के कारण इस वर्ष दीपोत्सव का पर्व पांच नहीं, बल्कि पूरे छह दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. छह दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर 2026 को धनतेरस के साथ होगी और इसका समापन 11 नवंबर को भाईदूज पर होगा.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार 8 नवंबर को दीपावली का मुख्य पर्व यानी महालक्ष्मी पूजन संपन्न होगा, जबकि प्रतिपदा तिथि के समय चक्र के कारण गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को उदयातिथि में की जाएगी. बीच में 9 नवंबर का दिन सामाजिक मिलन यानी &lsquo;रामा-श्यामा&rsquo; के रूप में मनेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/B1-FcjjDGrs" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>छह दिवसीय दीपोत्सव 2026 का संपूर्ण कैलेंडर:</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>6 नवंबर 2026 धनतेरस (धन त्रयोदशी):</strong> भगवान धन्वंतरि जयंती, कुबेर पूजन व नई खरीदारी</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>7 नवंबर 2026 नरक / रूप चौदस एवं हनुमान जयंती:</strong> यम दीपदान, रूप निखार और संकटमोचन आराधना</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर 2026 दीपावली (महालक्ष्मी पूजन):</strong> स्थिर लग्न व प्रदोष काल में गणेश-लक्ष्मी पूजन</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>9 नवंबर 2026 रामा-श्यामा:</strong> आपसी सौहार्द, बधाई और मिलन समारोह</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>10 नवंबर 2026 अन्नकूट व गोवर्धन पूजा:</strong> प्रकृति व गौ-पूजन, भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>11 नवंबर 2026 भाईदूज (यम द्वितीया): </strong>भाई-बहन का प्रेम, तिलक व चित्रगुप्त पूजन</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>6 नवंबर: धनतेरस पर खरीदारी और आरोग्य का वरदान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से दीपोत्सव का शुभारंभ होता है. पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इस दिन सोना, <a title="चांदी" href="https://www.abplive.com/silver-prices" data-type="interlinkingkeywords">चांदी</a>, वाहन और पीतल के बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>त्रयोदशी तिथि प्रारंभ:</strong> 6 नवंबर, प्रातः 10:30 बजे से</li>
<li><strong>त्रयोदशी तिथि समाप्त:</strong> 7 नवंबर, प्रातः 10:48 बजे तक</li>
<li><strong>विशेष योग:</strong> हस्त नक्षत्र और शुक्र प्रदोष का दुर्लभ संयोग धनतेरस की खरीदारी को दीर्घकालिक और अक्षय फलदायी बनाता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>7 नवंबर: रूप चतुर्दशी और उत्तर भारतीय परंपरा की हनुमान जयंती</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दीपावली भी कहा जाता है. इस दिन अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए सायंकाल यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाया जाता है. साथ ही, उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा (मध्यरात्रि) में अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी का प्राकट्य हुआ था.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:</strong> 7 नवंबर, प्रातः 10:38 बजे से</li>
<li><strong>चतुर्दशी तिथि समाप्त:</strong> 8 नवंबर, प्रातः 11:29 बजे तक</li>
<li><strong>धार्मिक मान्यता:</strong> इस रात चित्रा नक्षत्र में हनुमान जी की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर: महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ समय और स्थिर लग्न</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दीपावली का पावन पर्व कार्तिक अमावस्या को प्रदोष काल में मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन हमेशा स्थिर लग्न और स्थिर नवमांश में करना चाहिए, ताकि धन-वैभव घर में स्थायी रूप से वास करे.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या तिथि प्रारंभ:</strong> 8 नवंबर, प्रातः 11:29 बजे से</li>
<li><strong>अमावस्या तिथि समाप्त:</strong> 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे तक</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>लक्ष्मी पूजन के मुख्य मुहूर्त:</strong></p>
<ol style="text-align: justify;">
<li><strong>प्रदोष काल (सर्वश्रेष्ठ सामान्य मुहूर्त):</strong> सायं 05:36 से रात्रि 08:02 तक</li>
<li><strong>स्थिर वृषभ लग्न (गृहस्थों के लिए उत्तम):</strong> सायं 06:04 से रात्रि 08:01 तक</li>
<li><strong>महामुहूर्त (प्रदोष + वृषभ लग्न + कुंभ नवमांश):</strong> सायं 06:16 से 06:28 एवं सायं 06:52 से 07:05 तक</li>
<li><strong>स्थिर सिंह लग्न (निशीथ काल / तांत्रिक व व्यापारिक साधना):</strong> मध्यरात्रि 12:34 से 02:50 तक</li>
</ol>
<p style="text-align: justify;"><strong>9 नवंबर: रामा-श्यामा और पारिवारिक मेल-मिलाप</strong></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी. प्रतिपदा तिथि दोपहर के बाद शुरू होने से इस दिन कोई बड़ा अनुष्ठान न होकर &lsquo;रामा-श्यामा&rsquo; का परंपरागत पर्व मनाया जाएगा. इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर चरण स्पर्श करते हैं, गले मिलकर दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं और पुराने मनमुटाव भुलाकर नए संबंधों की शुरुआत करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>10 नवंबर: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु के अनुसार गोवर्धन पूजा उदयातिथि व्यापिनी प्रतिपदा में की जाती है. 9 नवंबर को दोपहर बाद प्रतिपदा लगने के कारण शास्त्रसम्मत निर्णय के तहत गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी. इस दिन गौ-माता की पूजा की जाती है, गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर उनकी परिक्रमा होती है और भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>11 नवंबर: भाईदूज के साथ महापर्व का समापन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाईदूज या यम द्वितीया कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज को आदरपूर्वक भोजन कराया था और उनसे वरदान मांगा था. इस पावन अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं. इसी दिन कलम-दवात और भगवान चित्रगुप्त की विधिवत पूजा भी संपन्न होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस बार 8 नवंबर को दीपावली का मुख्य पर्व यानी महालक्ष्मी पूजन संपन्न होगा, जबकि प्रतिपदा तिथि के समय चक्र के कारण गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को उदयातिथि में की जाएगी. बीच में 9 नवंबर का दिन सामाजिक मिलन यानी &lsquo;रामा-श्यामा&rsquo; के रूप में मनेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/B1-FcjjDGrs" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>छह दिवसीय दीपोत्सव 2026 का संपूर्ण कैलेंडर:</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>6 नवंबर 2026 धनतेरस (धन त्रयोदशी):</strong> भगवान धन्वंतरि जयंती, कुबेर पूजन व नई खरीदारी</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>7 नवंबर 2026 नरक / रूप चौदस एवं हनुमान जयंती:</strong> यम दीपदान, रूप निखार और संकटमोचन आराधना</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर 2026 दीपावली (महालक्ष्मी पूजन):</strong> स्थिर लग्न व प्रदोष काल में गणेश-लक्ष्मी पूजन</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>9 नवंबर 2026 रामा-श्यामा:</strong> आपसी सौहार्द, बधाई और मिलन समारोह</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>10 नवंबर 2026 अन्नकूट व गोवर्धन पूजा:</strong> प्रकृति व गौ-पूजन, भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>11 नवंबर 2026 भाईदूज (यम द्वितीया): </strong>भाई-बहन का प्रेम, तिलक व चित्रगुप्त पूजन</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>6 नवंबर: धनतेरस पर खरीदारी और आरोग्य का वरदान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से दीपोत्सव का शुभारंभ होता है. पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इस दिन सोना, <a title="चांदी" href="https://www.abplive.com/silver-prices" data-type="interlinkingkeywords">चांदी</a>, वाहन और पीतल के बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>त्रयोदशी तिथि प्रारंभ:</strong> 6 नवंबर, प्रातः 10:30 बजे से</li>
<li><strong>त्रयोदशी तिथि समाप्त:</strong> 7 नवंबर, प्रातः 10:48 बजे तक</li>
<li><strong>विशेष योग:</strong> हस्त नक्षत्र और शुक्र प्रदोष का दुर्लभ संयोग धनतेरस की खरीदारी को दीर्घकालिक और अक्षय फलदायी बनाता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>7 नवंबर: रूप चतुर्दशी और उत्तर भारतीय परंपरा की हनुमान जयंती</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दीपावली भी कहा जाता है. इस दिन अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए सायंकाल यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाया जाता है. साथ ही, उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा (मध्यरात्रि) में अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी का प्राकट्य हुआ था.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:</strong> 7 नवंबर, प्रातः 10:38 बजे से</li>
<li><strong>चतुर्दशी तिथि समाप्त:</strong> 8 नवंबर, प्रातः 11:29 बजे तक</li>
<li><strong>धार्मिक मान्यता:</strong> इस रात चित्रा नक्षत्र में हनुमान जी की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर: महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ समय और स्थिर लग्न</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दीपावली का पावन पर्व कार्तिक अमावस्या को प्रदोष काल में मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन हमेशा स्थिर लग्न और स्थिर नवमांश में करना चाहिए, ताकि धन-वैभव घर में स्थायी रूप से वास करे.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या तिथि प्रारंभ:</strong> 8 नवंबर, प्रातः 11:29 बजे से</li>
<li><strong>अमावस्या तिथि समाप्त:</strong> 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे तक</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>लक्ष्मी पूजन के मुख्य मुहूर्त:</strong></p>
<ol style="text-align: justify;">
<li><strong>प्रदोष काल (सर्वश्रेष्ठ सामान्य मुहूर्त):</strong> सायं 05:36 से रात्रि 08:02 तक</li>
<li><strong>स्थिर वृषभ लग्न (गृहस्थों के लिए उत्तम):</strong> सायं 06:04 से रात्रि 08:01 तक</li>
<li><strong>महामुहूर्त (प्रदोष + वृषभ लग्न + कुंभ नवमांश):</strong> सायं 06:16 से 06:28 एवं सायं 06:52 से 07:05 तक</li>
<li><strong>स्थिर सिंह लग्न (निशीथ काल / तांत्रिक व व्यापारिक साधना):</strong> मध्यरात्रि 12:34 से 02:50 तक</li>
</ol>
<p style="text-align: justify;"><strong>9 नवंबर: रामा-श्यामा और पारिवारिक मेल-मिलाप</strong></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी. प्रतिपदा तिथि दोपहर के बाद शुरू होने से इस दिन कोई बड़ा अनुष्ठान न होकर &lsquo;रामा-श्यामा&rsquo; का परंपरागत पर्व मनाया जाएगा. इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर चरण स्पर्श करते हैं, गले मिलकर दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं और पुराने मनमुटाव भुलाकर नए संबंधों की शुरुआत करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>10 नवंबर: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु के अनुसार गोवर्धन पूजा उदयातिथि व्यापिनी प्रतिपदा में की जाती है. 9 नवंबर को दोपहर बाद प्रतिपदा लगने के कारण शास्त्रसम्मत निर्णय के तहत गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी. इस दिन गौ-माता की पूजा की जाती है, गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर उनकी परिक्रमा होती है और भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>11 नवंबर: भाईदूज के साथ महापर्व का समापन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाईदूज या यम द्वितीया कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज को आदरपूर्वक भोजन कराया था और उनसे वरदान मांगा था. इस पावन अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं. इसी दिन कलम-दवात और भगवान चित्रगुप्त की विधिवत पूजा भी संपन्न होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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