Diwali 2026: 8 नवंबर को स्थिर लग्न में करें लक्ष्मी पूजन, देखें प्रदोष काल का समय
07 Nov 2026, 07:43 PM

Diwali 2026: 8 नवंबर को स्थिर लग्न में करें लक्ष्मी पूजन, देखें प्रदोष काल का समय

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Diwali 2026: </strong>कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपों का महापर्व दीपावली सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों के मन में तिथि और पूजन समय को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है कि दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाए या 9 नवंबर को?</p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही मनाना सर्वश्रेष्ठ और शास्त्रसम्मत रहेगा. आइए विस्तार से समझते हैं कि 8 नवंबर को ही लक्ष्मी पूजन क्यों शुभ है, साथ ही जानते हैं प्रदोष काल, स्थिर लग्न और चौघड़िया के सटीक मुहूर्त.</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9wpBtKhLxkk" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर को ही क्यों मनाई जाएगी दीपावली?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म में त्योहारों के निर्णय में उदयातिथि और कर्मव्यापिनी तिथि (जिस समय वह कर्म किया जाना हो) का विशेष महत्व होता है. दीपावली का मुख्य विधान प्रदोष काल और निशीथ काल में लक्ष्मी पूजन है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कार्तिक अमावस्या प्रारंभ:</strong> 08 नवंबर 2026 को प्रातः 11:29 बजे से</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कार्तिक अमावस्या समाप्त:</strong> 09 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि 8 नवंबर की शाम और रात्रि को अमावस्या तिथि पूर्ण रूप से व्याप्त रहेगी, इसलिए प्रदोष काल व्यापिनी अमावस्या का योग 8 नवंबर को ही बन रहा है. </p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर को दोपहर में ही अमावस्या समाप्त हो जाएगी, जिसके कारण उस शाम प्रदोष काल में प्रतिपदा तिथि लग जाएगी. बाद में शास्त्रों के नियमानुसार दीपोत्सव और महालक्ष्मी पूजन 8 नवंबर को ही संपन्न होगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लक्ष्मी पूजन में 'प्रदोष काल' और 'स्थिर लग्न' का महत्व:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि महालक्ष्मी का पूजन हमेशा प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ या सिंह लग्न) में ही करना चाहिए:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्रदोष काल:</strong> सूर्यास्त के बाद के लगभग 2 घंटे 24 मिनट की अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है. धर्मग्रंथों में उल्लेख है:</p>
<p style="text-align: justify;">प्रदोष समये दीपदानोल्का प्रदर्शन लक्ष्मी पूजनानि कृत्वाॅ भोजनं कार्यम्।।</p>
<p style="text-align: justify;">अर्थात प्रदोष काल में दीपदान और महालक्ष्मी का पूजन करके ही भोजन ग्रहण करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्थिर लग्न:</strong> स्थिर लग्न में पूजा करने से घर-परिवार और व्यापार में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और चंचलता दूर होती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर 2026: लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्रदोष काल-</strong> शाम 05:36 बजे से रात 08:02 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)-</strong> शाम 06:04 बजे से रात 08:01 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महानिशीथ काल (सिंह लग्न)-</strong> रात 12:34 बजे से देर रात 02:50 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आप बहुत शुभ और अचूक समय में पूजन करना चाहते हैं, तो शाम को दो विशेष योग बन रहे हैं जब प्रदोष काल, स्थिर लग्न वृषभ और स्थिर नवमांश कुंभ एक साथ उपस्थित रहेंगे:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>प्रथम अति-शुभ मुहूर्त:</strong> शाम 06:16 से शाम 06:28 तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>द्वितीय अति-शुभ मुहूर्त:</strong> शाम 06:52 से शाम 07:05 तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>8 नवंबर के शुभ चौघड़िया मुहूर्त:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आप अपनी सुविधानुसार चौघड़िया देखकर प्रतिष्ठान या घर में दीपक प्रज्वलित व बही-खाता पूजन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित समय का ध्यान रखें:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दिन के चौघड़िया मुहूर्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चर, लाभ, अमृत:</strong> प्रातः 08:06 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अभिजित मुहूर्त:</strong> प्रातः 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुभ चौघड़िया:</strong> दोपहर 01:32 बजे से दोपहर 02:53 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात्रि के चौघड़िया मुहूर्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुभ, अमृत, चर:</strong> शाम 05:36 बजे से रात्रि 10:31 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लाभ चौघड़िया:</strong> मध्यरात्रि 01:49 बजे से देर रात 03:27 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शुभ चौघड़िया:</strong> भोर में 05:55 बजे से प्रातः 06:45 बजे तक</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दीपावली पूजन विधि और विशेष फलदायी उपाय:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दीपावली केवल बाहरी साज-सज्जा का नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और ईश्वरीय कृपा पाने का पावन अवसर है. पूजा को पूर्ण फलदायी बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>समग्र देव पूजन:</strong> मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश के साथ-साथ विद्या की देवी मां सरस्वती, धन के अधिपति कुबेर देव और सृष्टि के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना अवश्य करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रक्षक व लोकपाल देवों का स्मरण:</strong> इस रात्रि हनुमान जी, यमराज, भगवान चित्रगुप्त, भैरव जी, अपने कुलदेवता और पितरों के नाम से भी दीप प्रज्वलित करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मंत्र एवं स्तोत्र पाठ:</strong> पूजा के समय 'श्रीसूक्त', 'कनकधारा स्तोत्र' अथवा 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करना घर में आर्थिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्वच्छता और प्रकाश:</strong> अथर्ववेद के अनुसार, जल, अन्न और सभी सांसारिक सुख प्रदान करने वाली पृथ्वी स्वरूपा भगवती ही लक्ष्मी हैं. घर के मुख्य द्वार को साफ-सुथरा रखकर स्वास्तिक बनाएं और सुगंधित धूप-दीप से वातावरण को पावन रखें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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