21 Oct 2026, 11:22 PM
गोल्ड की तरह महंगा होगा तांबा! संकट गहराया, 16 साल में बनती है एक माइन
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><a title="सोने की कीमत" href="https://www.abplive.com/gold-prices" data-type="interlinkingkeywords">सोने की कीमत</a>ें पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ते- बढ़ते आसमान छूने लगी हैं. जिसका असर जनता के ऊपर भी तेजी से पढ़ रहा है. वहीं अब एक धातु और है जो सोने की ही तरह अपने भाव बढ़ाने को तैयार है. ये धातु है तांबा (Copper), जिसके दाम आने वाले समय में तेजी से बढ़ने वाले हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट में सामने आया है.</p>
<p style="text-align: justify;">गोल्डमैन सैश क मुताबिक तांबे की खदान को बनने में करीब 16 साल लगते हैं और ये खदानें कम हो रही हैं. जिसके कारण तांबे की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में आने वाले समय में तांबे का संकट गहराने वाला है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रिपोर्ट में क्या आया सामने?</strong><br />गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के मुताबिक, तांबे की किसी भी खदान की खोज से लेकर वहां पर पहला प्रोडक्शन शउरू करने तक अब करीब 16 साल से भी ज्यादा का समय लगता है. अब ऐसे में जब साल 2030 से फिलहाल जो खदाने हैं, उनसे प्रोडक्शन में कमी आने की आशंका है. इसलिए सिर्फ कीमतें बढ़ने से ही निवेश की अवधि के अंदर आपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>संरचनात्मक है कमी</strong><br />गौल्डमैन सैश की रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'तांबे की आपूर्ति में कमी संरचनात्मक है, ना कि चक्रीय. इसमें मुख्य रूप से कीमतों के जरिए बदलाव आएगा, और बाजार धीरे-धीरे तांबा कंपनियों तथा उन विकास संपत्तियों को ज्यादा महत्व देगा, जिनकी नकल करना मुश्किल, महंगा और समय लेने वाला काम है.'</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तांबे की बड़ी खोज में आई कमी</strong><br />इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 1990 के दशक से ही तांबे की किसी बड़ी खोज में कमी आई है. तो वहीं ओर ग्रेड (अयस्क की गुणवत्ता) भी गिर गई है. खासकर दक्षिण अमेरिका में ये सबसे ज्यादा देखा गया है. इसके अलावा नए प्रोजेक्ट्स अब दूर-दराज के इलाकों में शुरू किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन और कॉस्टिंग का खर्च भी बढ़ गया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/business/data-of-3897-sbi-customers-leaked-could-your-information-have-been-stolen-too-3204838">SBI में खाता है, कहीं आपकी जानकारी भी तो नहीं हुई चोरी? जानिए क्या करें</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;">गोल्डमैन सैश क मुताबिक तांबे की खदान को बनने में करीब 16 साल लगते हैं और ये खदानें कम हो रही हैं. जिसके कारण तांबे की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में आने वाले समय में तांबे का संकट गहराने वाला है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रिपोर्ट में क्या आया सामने?</strong><br />गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के मुताबिक, तांबे की किसी भी खदान की खोज से लेकर वहां पर पहला प्रोडक्शन शउरू करने तक अब करीब 16 साल से भी ज्यादा का समय लगता है. अब ऐसे में जब साल 2030 से फिलहाल जो खदाने हैं, उनसे प्रोडक्शन में कमी आने की आशंका है. इसलिए सिर्फ कीमतें बढ़ने से ही निवेश की अवधि के अंदर आपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>संरचनात्मक है कमी</strong><br />गौल्डमैन सैश की रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'तांबे की आपूर्ति में कमी संरचनात्मक है, ना कि चक्रीय. इसमें मुख्य रूप से कीमतों के जरिए बदलाव आएगा, और बाजार धीरे-धीरे तांबा कंपनियों तथा उन विकास संपत्तियों को ज्यादा महत्व देगा, जिनकी नकल करना मुश्किल, महंगा और समय लेने वाला काम है.'</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तांबे की बड़ी खोज में आई कमी</strong><br />इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 1990 के दशक से ही तांबे की किसी बड़ी खोज में कमी आई है. तो वहीं ओर ग्रेड (अयस्क की गुणवत्ता) भी गिर गई है. खासकर दक्षिण अमेरिका में ये सबसे ज्यादा देखा गया है. इसके अलावा नए प्रोजेक्ट्स अब दूर-दराज के इलाकों में शुरू किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन और कॉस्टिंग का खर्च भी बढ़ गया है.</p>
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Source Credit: abplive.com
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