Uttar Pradesh
01 Oct 2026, 12:47 PM
'प्लानिंग चलती रहती थी...', चंपत राय ने सुनाया अशोक सिंघल का किस्सा
ABP News
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<p style="text-align: justify;">विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता और श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय बुधवार को कानपुर पहुंचे, जहां उन्होंने बेनाझावर स्थित बीएनएसडी कॉलेज में दिवंगत वीएचनी नेता अशोक सिंघल की जन्म शता कार्यक्रम में हिस्सा लिया, इस दौरान उन्होंने अशोक सिंघल द्वारा समाज के लिए किए गए कामों को गिनाया और 1987 के प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा वो जो प्लानिंग करते थे, उसमें उन्हें सफलता भी मिलती थी.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">अशोक सिंघल से जुड़ा प्रसंग बताया</h3>
<p style="text-align: justify;">चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने हमेशा से ही साधु संतों के लिए काम किया. उन्होंने कहा कि "देश में जो संतों के साथ परिचित हैं उनके जीवन की ये अनूठी बात है. इस प्रकार उनमें (अशोक सिंघल) ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐसा आत्मविश्वास था कि जब भी वे किसी काम को अपने हाथ में ले लेते थे, तो उसकी बहुत अच्छी प्लानिंग करते थे और वो प्लानिंग उनके मन में अंदर ही अंदर चलती रहती थी. इसलिए सफलता प्राप्त होती थी."&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि 1986 में रामजन्मभूमि का ताले खुल गए लेकिन, पंजाब में भयंकर आतंकवाद था. केशधारी को सिख और सहजधारी को हिन्दू ऐसा लगा दोनों अलग-अलग हैं. राजीव गांधी उस समय देश के प्रधानमंत्री थे. इस इतिहास की सच्चाई को खोजिए, देश के प्रधानमंत्री उस आतंकवाद के काल में कभी पंजाब नहीं गए. विचार हुआ कि विश्व हिंदू परिषद को समाज के मनोबल को बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए. तब तक अशोक जी का संबंध संतों से व्यापक हो गया था.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">साधु-संतों के लिए किया काम- अशोक सिंघल</h3>
<p style="text-align: justify;">ये घटना 1987 की है. हरिद्वार की हर की पैड़ी और अमृतसर का स्वर्ण मंदिर आंतकवाद का केंद्र..उसे कहा गया हरमंदर साहिब आज भी कहते हैं. हर की पैड़ी से हरमंदर साहब.. हरिद्वार से अमृतसर तक संतों की पैदल यात्रा निकाली गई. संतों को मानसिक तैयारी की गईं. मैं ऐसे संतों को भी जानता हूं जो अपने पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंपकर आए कि पता नहीं आतंकवाद की वजह से वापस जिंदा लौटेंगे भी या नहीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चंपत राय ने कहा कि उस समय कम से कम 300-400 संतो हरिद्वार से चले अपनी गाड़ियों से.. 40 सभाएं हुईं, भिंडरवाला से मिले, हरेक शहर में संतों को पैदल चलना होता था. अशोक जी भी चले..कितना आत्मविश्वास उनका रहा होगा. भयंकर आतंकवाद के काल का अध्ययन करिए, मैं 1987 की बात कर रहा हूं. &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a title="10 करोड़ की FD, करोड़ों के जेवर, सपा प्रत्याशी धनराज नथवानी की दौलत जान उड़ जाएंगे होश!" href="https://www.abplive.com/states/up-uk/sp-rajya-sabha-candidate-dhanraj-parimal-nathwani-10-crores-fixed-deposit-total-income-in-election-affidavit-3196011" target="_self">10 करोड़ की FD, करोड़ों के जेवर, सपा प्रत्याशी धनराज नथवानी की दौलत जान उड़ जाएंगे होश!</a></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;">अशोक सिंघल से जुड़ा प्रसंग बताया</h3>
<p style="text-align: justify;">चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने हमेशा से ही साधु संतों के लिए काम किया. उन्होंने कहा कि "देश में जो संतों के साथ परिचित हैं उनके जीवन की ये अनूठी बात है. इस प्रकार उनमें (अशोक सिंघल) ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐसा आत्मविश्वास था कि जब भी वे किसी काम को अपने हाथ में ले लेते थे, तो उसकी बहुत अच्छी प्लानिंग करते थे और वो प्लानिंग उनके मन में अंदर ही अंदर चलती रहती थी. इसलिए सफलता प्राप्त होती थी."&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि 1986 में रामजन्मभूमि का ताले खुल गए लेकिन, पंजाब में भयंकर आतंकवाद था. केशधारी को सिख और सहजधारी को हिन्दू ऐसा लगा दोनों अलग-अलग हैं. राजीव गांधी उस समय देश के प्रधानमंत्री थे. इस इतिहास की सच्चाई को खोजिए, देश के प्रधानमंत्री उस आतंकवाद के काल में कभी पंजाब नहीं गए. विचार हुआ कि विश्व हिंदू परिषद को समाज के मनोबल को बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए. तब तक अशोक जी का संबंध संतों से व्यापक हो गया था.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">साधु-संतों के लिए किया काम- अशोक सिंघल</h3>
<p style="text-align: justify;">ये घटना 1987 की है. हरिद्वार की हर की पैड़ी और अमृतसर का स्वर्ण मंदिर आंतकवाद का केंद्र..उसे कहा गया हरमंदर साहिब आज भी कहते हैं. हर की पैड़ी से हरमंदर साहब.. हरिद्वार से अमृतसर तक संतों की पैदल यात्रा निकाली गई. संतों को मानसिक तैयारी की गईं. मैं ऐसे संतों को भी जानता हूं जो अपने पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंपकर आए कि पता नहीं आतंकवाद की वजह से वापस जिंदा लौटेंगे भी या नहीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">चंपत राय ने कहा कि उस समय कम से कम 300-400 संतो हरिद्वार से चले अपनी गाड़ियों से.. 40 सभाएं हुईं, भिंडरवाला से मिले, हरेक शहर में संतों को पैदल चलना होता था. अशोक जी भी चले..कितना आत्मविश्वास उनका रहा होगा. भयंकर आतंकवाद के काल का अध्ययन करिए, मैं 1987 की बात कर रहा हूं. &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a title="10 करोड़ की FD, करोड़ों के जेवर, सपा प्रत्याशी धनराज नथवानी की दौलत जान उड़ जाएंगे होश!" href="https://www.abplive.com/states/up-uk/sp-rajya-sabha-candidate-dhanraj-parimal-nathwani-10-crores-fixed-deposit-total-income-in-election-affidavit-3196011" target="_self">10 करोड़ की FD, करोड़ों के जेवर, सपा प्रत्याशी धनराज नथवानी की दौलत जान उड़ जाएंगे होश!</a></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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